सीएम योगी आदित्यनाथ का "बंटेंगे तो कटेंगे" वाला बयान चर्चा का विषय बना हुआ है। इस बयान को लेकर विपक्ष ने उन पर निशाना साधा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सीएम योगी के इस बयान की निंदा करते हुए इसे "आतंकी भाषा" बताया। कांग्रेस नेता खड़गे ने कहा कि, किसी साधु या संत से ऐसे बयान की उम्मीद नहीं की जा सकती। वहीं कांग्रेस नेता खड़गे के बयान पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने पलटवार करते हुए कहा कि, वे एक योगी हैं, और उनके लिए देश सबसे पहले आता है। बीजेपी नेता योगी ने आरोप लगाया कि, कांग्रेस का नेतृत्व हमेशा तुष्टिकरण की नीति को प्राथमिकता देता है।
मुस्लिम वोट-बैंक के लिए अपने परिवार का बलिदान भूले खड़गे
यूपी के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने इस दौरान यह भी कहा है कि, खड़गे के गांव का इतिहास निजाम के अधीन था और उस समय कांग्रेस का नेतृत्व मुस्लिम लीग के साथ खामोश था, जबकि मुस्लिम लीग हिंदुओं पर अत्याचार कर रही थी। योगी ने आरोप लगाया कि खरगे का गांव भी हिंसा की चपेट में आया था, जिसमें खरगे के परिवार के लोग मारे गए थे। लेकिन योगी के अनुसार, खरगे इस बात को इसलिए नहीं बताते क्योंकि इससे मुस्लिम वोट बैंक पर असर पड़ सकता है। योगी ने कहा कि खरगे अपने वोट बैंक के लिए अपने परिवार के बलिदान को नजरअंदाज कर रहे हैं और उन्हें केवल अपने वोट बैंक की चिंता है।
"बंटेंगे तो कटेंगे" जैसा बयान एक साधु की भाषा नहीं हो सकती
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने झारखंड में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और अन्य साधुओं पर भी निशाना साधते हुए कहा था कि, कई साधु अब राजनेता बन गए हैं और गेरुआ वस्त्र पहनकर समाज में नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं। खड़गे ने इस दौरान आगे कहा कि, "बंटेंगे तो कटेंगे" जैसा बयान एक साधु की भाषा नहीं हो सकती, बल्कि इसे आतंकी भाषा के समान कहा। इस विवाद के चलते दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है, और इस बयान को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
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