नई दिल्ली - मानेकशॉ सेंटर में आयोजित सेना संवाद' कार्यक्रम में सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा कि, हर सैनिक की तरह वह भी जल्द सेवानिवृत्त होंगे, लेकिन करीब आधी सदी की सैन्य सेवा से मिले अनुभव को भारतीय सशस्त्र बलों की नई पीढ़ी के अधिकारियों के साथ साझा करना चाहते हैं।
मेरी यात्रा लगभग 49 वर्षों की हो चुकी है
जनरल चौहान ने अपने संबोधन में आगे कहा कि, राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) और भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) के प्रशिक्षण काल को जोड़ दिया जाए तो वर्दी में उनकी यात्रा लगभग 49 वर्षों की हो चुकी है। CDS ने आगे कहा कि, इस लंबे अनुभव में उन्होंने सुरक्षा और रक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं को करीब से समझा है, जिसे वह भविष्य के सैन्य नेतृत्व तक पहुंचाना चाहते हैं ताकि नई पीढ़ी को बार-बार वही सब सीखने की जरूरत न पड़े।
ऑपरेशन सिंदूर पूरी तरह अलग था
जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर को भारत के पिछले सैन्य अभियानों से पूरी तरह अलग बताया। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने अपने संबोधन में आगे कहा कि, यह पहली बार था जब भारत ने थल, जल, वायु, अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्र समेत कई मोर्चों पर समन्वित तरीके से बहु-आयामी अभियान चलाया।
युद्ध पारंपरिक 'कांटैक्ट वारफेयर' से अलग था
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल ने कहा कि, यह युद्ध पारंपरिक 'कांटैक्ट वारफेयर' से अलग था और इसमें नई तकनीकों का व्यापक इस्तेमाल हुआ। करीब 88 घंटे तक चले अभियान में तीनों सेनाओं के साथ विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच अभूतपूर्व समन्वय देखने को मिला।
ऑपरेशन सिंदूर में जीत के पैमाने भी अलग थे
मानेकशॉ सेंटर में आयोजित सेना संवाद' कार्यक्रम में सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा कि, ऑपरेशन सिंदूर में जीत के पैमाने भी अलग थे। पहले युद्धों में क्षेत्र पर कब्जा, दुश्मन के उपकरणों का विनाश और युद्धबंदियों की संख्या सफलता का पैमाना मानी जाती थी, लेकिन इस अभियान में सैकड़ों किलोमीटर दूर से सटीक हमले कर भारत ने अपनी तकनीकी और रणनीतिक क्षमता का प्रदर्शन किया।
पुस्तक का विषय ऑपरेशन सिंदूर होगा
सेना संवाद' कार्यक्रम में सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने जनता और छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि, यह भी बताया कि उनकी अगली पुस्तक का विषय ऑपरेशन सिंदूर होगा। उल्लेखनीय है कि भारत ने पिछले वर्ष पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले करते हुए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था।