केंद्र सरकार ने कल यानी की मंगलवार नई संसद भवन में महिला आरक्षण बिल पेश किया। दूसरी ओर इस बिल को लेकर सियासत होने लगी है। इस बिल को लेकर अखिलेश यादव ने कहा कि, नई संसद के पहले दिन ही सरकार ने ‘महाझूठ’ से पारी शुरू की है। उन्होंने कहा कि, जनगणना और परिसीमन के बिना महिला आरक्षण बिल लागू नहीं होगा। इस काम में कई साल लग जाएंगे। सरकार को महिलाओं से झूठ बोलने की क्या जरूरत थी। सपा प्रमुख ने आगे कहा कि, सरकार न जनगणना के पक्ष में है न जातिगत गणना के और इनके बिना तो महिला आरक्षण संभव ही नहीं है।
ये आधा-अधूरा बिल ‘महिला आरक्षण’ जैसे गंभीर विषय का उपहास है
यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने अपने एक्स ( ट्वीट) पर पोस्ट करते हुए लिखा कि, जब जनगणना और परिसीमन के बिना महिला आरक्षण बिल लागू हो ही नहीं सकता, जिसमें कई साल लग जाएँगे, तो बीजेपी सरकार को इस आपाधापी में महिलाओं से झूठ बोलने की क्या ज़रूरत थी। बीजेपी सरकार न जनगणना के पक्ष में है न जातिगत गणना के, इनके बिना तो महिला आरक्षण संभव ही नहीं है। सपा प्रमुख ने आगे अपने इस लेख में लिखा है कि, ये आधा-अधूरा बिल ‘महिला आरक्षण’ जैसे गंभीर विषय का उपहास है, इसका जवाब महिलाएं आगामी चुनावों में भाजपा के विरूद्ध वोट डालकर देंगी।
हम चाहते हैं कि OBC महिलाओं का भी इसमें आरक्षण निर्धारित हो
"महिला आरक्षण बिल" को लेकर समाजवादी की नेत्री डिंपल यादव ने केंद्र की मोदी सरकार की नीयत पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि, सरकार को 9 साल पूरे हो गए हैं। अगर इन्हें महिला आरक्षण बिल लाना था, तो ये पहले ला सकते थे। ये इसे आखिरी साल में ला रहे हैं, जब चुनाव हैं। उन्होंने अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि, सपा ने हमेशा इसका समर्थन किया है और हम सभी चाहते हैं कि OBC महिलाओं का भी इसमें आरक्षण निर्धारित हो, क्योंकि जो आखिरी पंक्ति में खड़ी महिलाएं हैं, उन्हें उनका हक मिलना चाहिए।
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