बिहार में जातिगत जनगणना की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद देशभर में इसको लेकर सियासत तेज हो गई है। इसी क्रम में कई राज्यों के विपक्षी दल जातिगत जनगणना कराने की मांग कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस के सीनियर नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेता ने एक नई मांग रखते हुए कहा कि, नीतीश कुमार को अब सीएम की कुर्सी किसी दलित और मुसलमान नेता को सौंप देनी चाहिए।
दलित और मुस्लिम को सौंप दें बिहार की कुर्सी
कांग्रेस के सीनियर नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने नीतीश कुमार के पीएम होने पर हमला बोला है और कहा है कि, 20 फीसदी दलित और 18 फीसद मुस्लिम आबादी के होते हुए 3 प्रतिशत वाली जाति का सीएम होना तो बेइमानी है। उन्होंने आगे अपने इस बयान में कहा कि, कांग्रेस जिसकी ‘जितनी हिस्सेदारी उसकी उतनी भागीदारी’ नीति में विश्वास रखती है। चूंकि बिहार सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों में सबसे ज्यादा आबादी दलितों और मुसलमानों की है, इसलिए सीएम को अपनी कुर्सी किसी दलित या मुसलमान नेता को सौंप देनी चाहिए।
जाति आधारित जनगणना करने में बिहार पहला राज्य है
आपको बता दें कि, जाति आधारित जनगणना के आंकड़ों को प्रस्तुत करने वाला बिहार देश का पहला राज्य बन गया है। जो आंकड़े सामने आए हैं, उसके अनुसार, बिहार की कुल आबादी 13 करोड़ से ज्यादा है। इनमें ओबीसी और अति पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) की हिस्सेदारी 63 फीसदी है तो वहीं अति पिछड़ा वर्ग 36.01 प्रतिशत हैं, जबकि पिछड़े वर्ग की आबादी 27.13 फीसदी है। आंकड़ों के अनुसार, यहां पर एससी की जनसंख्या 19.65 प्रतिशत है।
बिहार में पिछड़ों में सबसे ज्यादा संख्या यादवों की है
जातिगत जनगणना की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में पिछड़ों में सबसे ज्यादा संख्या यादवों की सामने आई है। आंकडों की मानें तो यहां पर सवर्णो की संख्या लगभग 15.52 फीसदी हैं, जिसमें 5 प्रतिशत मुस्लिम सवर्ण भी शामिल हैं। आपको बता दें कि, नीतीश मंत्रिमंडल ने पिछले साल 2 जून को जाति गणना कराने की मंजूरी दी थी। इसी के साथ इसके लिए 500 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की थी।
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