नई दिल्ली. भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को और अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय तथा तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में भारत निर्वाचन आयोग ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट में मीडिया एवं संचार अधिकारियों का दूसरा एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया। इस सम्मेलन में देश के 16 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के विभिन्न जिलों से मीडिया नोडल अधिकारी, सोशल मीडिया नोडल अधिकारी, जिला जनसंपर्क अधिकारी तथा राज्य जनसंपर्क विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों सहित 260 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में सूचना प्रबंधन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनोन्मुख बनाना था, ताकि लोकतंत्र के सबसे महत्वपूर्ण पर्व को गलत सूचनाओं और दुष्प्रचार से सुरक्षित रखा जा सके।
पारदर्शी निर्वाचन व्यवस्था लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत निर्वाचन आयोग की प्रत्येक कार्यवाही संविधान, जनप्रतिनिधित्व संबंधी कानूनों तथा आयोग द्वारा समय-समय पर जारी स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित होती है। उन्होंने कहा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में करोड़ों मतदाताओं का विश्वास बनाए रखना आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता केवल निष्पक्ष मतदान से ही नहीं बल्कि सही, समयबद्ध और प्रमाणिक सूचना के व्यापक प्रसार से भी सुनिश्चित होती है। उन्होंने हाल में संपन्न विधानसभा चुनावों में दर्ज हुए रिकॉर्ड मतदान प्रतिशत को भारतीय मतदाताओं के लोकतांत्रिक विश्वास और निर्वाचन प्रणाली की स्वीकार्यता का प्रमाण बताया।
डिजिटल युग में भ्रामक सूचनाओं से मुकाबला सबसे बड़ी चुनौती
सम्मेलन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ने सोशल मीडिया मंचों पर तेजी से फैल रही फर्जी खबरों, आधी-अधूरी सूचनाओं तथा सुनियोजित दुष्प्रचार अभियानों को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के लिए गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी के विस्तार ने जहां जनसंपर्क को अधिक प्रभावी बनाया है, वहीं भ्रामक सामग्री के तीव्र प्रसार का खतरा भी बढ़ा है। उन्होंने मीडिया एवं संचार अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे प्रत्येक सूचना का तथ्यात्मक सत्यापन सुनिश्चित करते हुए आधिकारिक सूचनाओं का तेज, सटीक और विश्वसनीय प्रसार करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि समय पर उपलब्ध कराई गई प्रमाणिक जानकारी ही अफवाहों और दुष्प्रचार को प्रभावी रूप से रोक सकती है।
एआई और डीपफेक के दौर में नई रणनीति की आवश्यकता
चुनाव आयुक्त डॉ. विवेक जोशी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डीपफेक तकनीक तथा डिजिटल माध्यमों पर तेजी से विकसित हो रही भ्रामक सामग्री के बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विश्वभर में चुनावी प्रक्रियाओं के सामने डिजिटल दुष्प्रचार एक गंभीर चुनौती बन चुका है और भारत को भी इसके प्रति पूरी तरह सजग रहने की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों से आयोग द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए फर्जी सामग्री की पहचान, तथ्य-जांच और समयबद्ध प्रतिक्रिया की क्षमता विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तकनीकी नवाचारों का उपयोग लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए होना चाहिए, न कि उसे भ्रमित करने के लिए।
युवा मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष फोकस
सम्मेलन में चुनावी साक्षरता क्लबों की भूमिका पर भी व्यापक चर्चा हुई। चुनाव आयुक्त ने कहा कि देश की बड़ी युवा आबादी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति है और उन्हें मतदान प्रक्रिया से जागरूक एवं सक्रिय रूप से जोड़ना समय की आवश्यकता है। विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों में संचालित चुनावी साक्षरता कार्यक्रमों के माध्यम से मतदान के महत्व, संवैधानिक अधिकारों तथा लोकतांत्रिक उत्तरदायित्वों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि जागरूक युवा मतदाता लोकतंत्र की गुणवत्ता और पारदर्शिता दोनों को मजबूत करते हैं।
राज्यों के अनुभवों से मजबूत होगी चुनावी संचार व्यवस्था
सम्मेलन में विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से आए अधिकारियों ने चुनावी संचार, मीडिया प्रबंधन, सोशल मीडिया रणनीति तथा जन-जागरूकता अभियानों के सफल अनुभव साझा किए। छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों के जनसंपर्क अधिकारियों ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अपनाए गए नवाचारों की जानकारी दी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के राष्ट्रीय संवाद राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान तथा भविष्य की चुनावी चुनौतियों से निपटने के लिए साझा रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डिजिटल युग में पारदर्शी, तथ्याधारित और त्वरित संचार व्यवस्था ही स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों की सबसे मजबूत आधारशिला बनती जा रही है।