कोलकाता/मुर्शिदाबाद: पश्चिम बंगाल में जहाँ एक ओर शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में पहली बीजेपी सरकार का शपथ ग्रहण समारोह चल रहा था, वहीं दूसरी ओर राज्य की राजनीति में एक और बड़ा धमाका हुआ है। 'आम जनता विकास पार्टी' के संस्थापक और नओदा से नवनिर्वाचित विधायक हुमायूं कबीर ने आगामी 2029 लोकसभा चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी को समर्थन देने का संकेत देकर सबको चौंका दिया है।
बीजेपी को 'अघोषित' समर्थन
हुमायूं कबीर ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी राज्य की केवल 6 सीटों (मुर्शिदाबाद की 3, मालदा की 2 और रायगंज) पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। कबीर ने कहा, "आगामी लोकसभा चुनाव में हम राज्य की बाकी सभी सीटें बीजेपी के लिए छोड़ देंगे। हम उन्हें अघोषित समर्थन देंगे।" राजनीतिक गलियारों में इसे हुमायूं द्वारा भविष्य के लिए अपना 'रास्ता साफ' करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।
मुर्शिदाबाद में TMC को दी चुनौती
कभी तृणमूल कांग्रेस का हिस्सा रहे हुमायूं कबीर ने अब अपनी पुरानी पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि वे मुर्शिदाबाद की तीनों लोकसभा सीटों पर टीएमसी को धूल चटाएंगे। उन्होंने दावा किया, "मैं खुद बहरामपुर से जीतूंगा और जंगीपुर व मुर्शिदाबाद सीटों पर भी अपने उम्मीदवारों को जीत दिलाऊंगा।"
बेटे को राजनीति में उतारने की तैयारी
हुमायूं कबीर ने इस बार विधानसभा चुनाव में नओदा और रेजिनगर, दो सीटों से जीत हासिल की है। नियम के मुताबिक उन्हें एक सीट छोड़नी होगी। उन्होंने घोषणा की है कि वे रेजिनगर सीट छोड़ेंगे और वहां होने वाले उपचुनाव में अपने बेटे गुलाम नबी आजाद को उम्मीदवार बनाएंगे।तृणमूल से अलग होकर अपनी नई पार्टी बनाने वाले हुमायूं कबीर का यह 'यू-टर्न' बंगाल की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकता है।