नई दिल्ली- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच भारत सरकार जल्द ही AI के लिए अलग कानूनी ढांचा तैयार कर सकती है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन ने संकेत दिए हैं कि अब AI को नियंत्रित करने के लिए विशेष कानून बनाने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय जल्द ही AI रेगुलेशन का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
सरकार के पुराने रुख में बड़ा बदलाव
अब तक केंद्र सरकार का मानना था कि AI से जुड़े मामलों से निपटने के लिए मौजूदा कानून, जैसे सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट और आईटी नियम पर्याप्त हैं। लेकिन अब सरकार AI तकनीक के तेजी से बढ़ते दायरे को देखते हुए अलग कानूनी व्यवस्था बनाने पर विचार कर रही है।
डीपफेक और फेक कंटेंट पर रहेगा फोकस
संभावित नए कानून में डीपफेक, भ्रामक जानकारी (Misinformation), ऑनलाइन फ्रॉड, AI के दुरुपयोग और डिजिटल सुरक्षा जैसे मुद्दों को प्रमुखता से शामिल किया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य AI इनोवेशन को बढ़ावा देने के साथ-साथ इसके गलत इस्तेमाल पर भी प्रभावी नियंत्रण रखना है।
दुनिया के कई देशों में पहले से लागू हैं AI नियम
AI रेगुलेशन को लेकर दुनिया के अलग-अलग देशों ने अलग मॉडल अपनाए हैं। यूरोपीय संघ (EU) AI Act लागू कर चुका है। वहीं ब्रिटेन मौजूदा रेगुलेटर्स के जरिए AI की निगरानी कर रहा है। अमेरिका फिलहाल कार्यकारी आदेशों और कंपनियों की स्वैच्छिक प्रतिबद्धताओं के आधार पर आगे बढ़ रहा है, जबकि चीन ने जनरेटिव AI और डीप सिंथेसिस तकनीकों के लिए अलग नियम बनाए हैं।
भारत उन्नत AI मॉडल तक पहुंच बढ़ाने में भी जुटा
आईटी सचिव एस. कृष्णन ने बताया कि भारत अमेरिकी सरकार और AI कंपनी Anthropic के साथ बातचीत कर रहा है। इसका उद्देश्य भारत को दुनिया के सबसे उन्नत AI मॉडल तक पहुंच दिलाना है, ताकि देश AI रिसर्च और तकनीकी विकास में तेजी से आगे बढ़ सके।