अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा भारत का नाम लिए जाने के बाद भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस विषय पर अमेरिका के साथ कोई द्विपक्षीय वार्ता नहीं हुई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि विभिन्न देशों के बीच इस विषय पर बातचीत चल रही हो सकती है, लेकिन भारत के साथ इस प्रकार की कोई चर्चा अब तक नहीं हुई है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि फिलहाल भारत किसी ऐसे अंतरराष्ट्रीय सैन्य गठबंधन का हिस्सा बनने पर विचार नहीं कर रहा है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य का वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में महत्व
होर्मुज़ जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग बीस प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर सैन्य हमलों के बाद से यह क्षेत्र अत्यधिक तनावपूर्ण बना हुआ है और ईरान की निगरानी के कारण इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। इस स्थिति ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों और समुद्री व्यापार को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
भारतीय जहाजों की आवाजाही पर विदेश मंत्री का बयान
इस बीच भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि कुछ भारतीय जहाज इस जलमार्ग से सुरक्षित रूप से गुजरने में सफल रहे हैं। उन्होंने बताया कि ईरानी अधिकारियों के साथ हुई बातचीत के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और संवाद की प्रक्रिया अभी भी जारी है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मार्ग से गुजरने वाले प्रत्येक भारतीय जहाज के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई है और इस संबंध में कोई व्यापक या स्थायी समझौता नहीं हुआ है।
अमेरिकी अधिकारी ने एशियाई देशों का किया उल्लेख
इस मुद्दे पर रविवार को आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस जलमार्ग को खोलने के लिए कई देशों से सहयोग मांग रहे हैं। उन्होंने चीन, जापान, ब्रिटेन, फ्रांस और दक्षिण कोरिया जैसे देशों का उल्लेख किया और बाद में एशिया के उन देशों की सूची में भारत का भी जिक्र किया जिनकी ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।
भारत ने कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने पर दिया जोर
भारत ने इस पूरे घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण संघर्ष बताते हुए यह संकेत दिया है कि वह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को प्राथमिकता देता है। ईरान के साथ भारत के लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को ध्यान में रखते हुए नई दिल्ली संतुलित और संवाद आधारित दृष्टिकोण अपनाने की कोशिश कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस जटिल परिस्थिति में भारत की कूटनीतिक सावधानी और संतुलित नीति महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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