मध्यप्रदेश के धार स्थित भोजशाला के धार्मिक स्वरूप से जुड़े मामले में आज इंदौर खंडपीठ में महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है। सुनवाई से पहले मामले में नया मोड़ तब आया, जब मस्जिद पक्ष के कई लोगों ने याचिका में पक्षकार बनाए जाने के लिए आवेदन दिया है।
मंदिर पक्ष ने जताया विरोध
मस्जिद पक्ष की ओर से दिए गए आवेदन पर मंदिर पक्ष के याचिकाकर्ताओं ने आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि इस तरह के आवेदन देकर मामले की सुनवाई को अनावश्यक रूप से लंबा करने की कोशिश की जा रही है।
सर्वे रिपोर्ट को लेकर उठाए सवाल
कमाल मौला वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष अब्दुल समद ने अदालत में अपनी लिखित आपत्तियां पेश की हैं। उनका कहना है कि सर्वे के दौरान ली गई रंगीन तस्वीरें और वीडियोग्राफी अभी तक उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। साथ ही रिपोर्ट में कुछ अहम तथ्यों को शामिल नहीं किए जाने की भी बात कही गई है। इन आपत्तियों पर आज अदालत में बहस होने की संभावना है।
ASI सर्वे पर हिंदू पक्ष की राय
वहीं हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से कहा गया है कि उन्हें ASI द्वारा कराए गए सर्वे से कोई आपत्ति नहीं है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ही अंतिम सुनवाई और निर्णय किया जाना चाहिए।
क्यों अहम मानी जा रही है सुनवाई
लंबे समय से चले आ रहे भोजशाला विवाद में सोमवार की सुनवाई को काफी अहम माना जा रहा है। अदालत के रुख से यह साफ हो सकेगा कि मामले की अगली प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ेगी।
ऐसे हाई कोर्ट तक पहुंचा भोजशाला विवाद
- भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर वर्षों से विवाद जारी है।
- हिंदू पक्ष इसे वाग्देवी (सरस्वती) मंदिर मानता है।
- मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है।
- 11 मार्च 2024 को हाई कोर्ट ने ASI को वैज्ञानिक सर्वे कराने के निर्देश दिए थे।
- 98 दिन तक चले सर्वे के बाद 2,189 पन्नों की रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई।
- बाद में सुप्रीम कोर्टने 28 जनवरी 2025 को मामले की सुनवाई इंदौर खंडपीठ में करने के निर्देश दिए।
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