वॉशिंगटन: फारस की खाड़ी में तीन युद्धपोतों की तैनाती और ईरान के हवाई क्षेत्र में अमेरिकी लड़ाकू विमानों की बमबारी के बावजूद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस पूरी स्थिति को 'युद्ध' मानने को तैयार नहीं हैं। गुरुवार को उन्होंने एक चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा, "यह एक संघर्ष (Conflict) है, युद्ध (War) नहीं"।
'वॉर पावर्स एक्ट' का चक्कर?
राजनयिक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के इस बदले हुए सुर के पीछे अमेरिका का 'वॉर पावर्स एक्ट' है:
नियम: अमेरिकी संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति कांग्रेस की मंजूरी के बिना केवल 60 दिनों तक ही युद्ध जारी रख सकते हैं।
डेडलाइन: 28 फरवरी को इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमला शुरू हुआ था, जिसकी 60 दिनों की समय सीमा 1 मई को समाप्त हो रही है।
प्रशासन का तर्क: स्पीकर माइक जॉनसन और रक्षा सचिव पीटर हेगसेथ का कहना है कि अभी सैन्य अभियान रुका हुआ है, इसलिए 60 दिनों की सीमा लागू नहीं होगी। हालांकि, डेमोक्रेट्स ने इसे कानून को तोड़ने की कोशिश बताया है。
'ईरान समझौता करने को बेताब'
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी घेराबंदी और हमलों से ईरान की नौसेना और वायु सेना लगभग तबाह हो चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है और वे अब समझौता करने के लिए बेताब हैं।
भारत-पाकिस्तान और नोबेल का जिक्र
इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने फिर से भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाने का श्रेय लिया। उन्होंने कहा कि दो परमाणु संपन्न देश युद्ध के कगार पर थे और उनके लड़ाकू विमान गिराए जा रहे थे। ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने 'टैरिफ' लगाने की धमकी दी, जिसके बाद लड़ाई रुकी। उन्होंने यह भी कहा कि इस काम के लिए कई देशों ने उन्हें धन्यवाद दिया है और नोबेल कमेटी को भी इस बारे में जानकारी है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को लेकर बेहद चिंतित है।