पश्चिम एशिया (West Asia) में धधक रही जंग की आग अब सिर्फ एक क्षेत्रीय संघर्ष नहीं, बल्कि तीसरे विश्व युद्ध की आहट दे रही है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की ताकत को कम आंककर वैसी ही 'ऐतिहासिक भूल' कर दी है, जैसी कभी इराक या वेनेजुएला के मामले में देखी गई थी। लेकिन ईरान, सद्दाम हुसैन का इराक नहीं है।
ईरानी प्रहार: अमेरिका और इजरायल को भारी चोट
ताजा रिपोर्टों के अनुसार, ईरान और उसके सहयोगियों ने अमेरिका के सैन्य ठिकानों को बुरी तरह ध्वस्त कर दिया है।
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अमेरिकी ठिकानों की तबाही: पश्चिम एशिया में स्थित अमेरिकी बेस इस कदर तबाह हुए हैं कि उन्हें सामान्य स्थिति में लौटने में कई साल लग सकते हैं।
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अमेरिका में 'स्लीपिंग सेल' का खौफ: टेक्सास की तेल रिफाइनरी और जॉर्जिया की एक अदालत में हुए धमाकों के पीछे ईरानी 'स्लीपिंग सेल्स' का हाथ होने का संदेह है। इसने ट्रंप प्रशासन की नींद उड़ा दी है।
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हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद: ईरान ने दुनिया की लाइफलाइन कहे जाने वाले इस रास्ते को बंद कर वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति ठप कर दी है।
ईरान युद्ध: भारत पर क्यों और कैसे पड़ रहा है असर?
भारत के लिए यह स्थिति 'इधर कुआँ, उधर खाई' जैसी है। भारत के संबंध ईरान, इजरायल और अमेरिका तीनों से गहरे हैं। लेकिन इस युद्ध की सबसे पहली और सीधी मार भारतीय रसोई और अर्थव्यवस्था पर पड़ी है।
1. ऊर्जा संकट: रसोई गैस और ईंधन की किल्लत
भारत अपनी जरूरत का 90% ईंधन पश्चिम एशिया से आयात करता है।
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कमर्शियल गैस पर बैन: सरकार ने आनन-फानन में कमर्शियल गैस की सप्लाई रोक दी है, जिससे देश के कई होटल और रेस्टोरेंट बंद हो गए हैं।
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घरेलू गैस की राशनिंग: घरों में मिलने वाली एलपीजी की मात्रा सीमित कर दी गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें दोगुनी हो गई हैं।
2. महंगाई की दोहरी मार: खाद से लेकर स्वास्थ्य तक
प्रधानमंत्री ने देश को आगाह किया है कि स्थिति 'महामारी' (Pandemic) जैसी हो सकती है।
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खाद्य सुरक्षा: उर्वरक (Fertilizers) की बढ़ती कीमतों के कारण अनाज और सब्जियों के दाम आसमान छूने वाले हैं।
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हेल्थ सेक्टर: पेट्रोलियम उत्पादों से बनने वाले सिरिंज और अन्य मेडिकल उपकरणों की लागत बढ़ गई है।
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महंगा हवाई सफर: पश्चिम एशिया का एयरस्पेस बंद होने से विमानों को लंबे रूट से जाना पड़ रहा है, जिससे टिकट दरें बढ़ गई हैं।
3. आर्थिक स्थिरता को खतरा
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रेमिटेंस (Remittance): खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीयों द्वारा भेजा जाने वाला पैसा, जो भारत के विदेशी मुद्रा भंडार की रीढ़ है, अब खतरे में है।
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शेयर बाजार: भारतीय शेयर बाजार इस युद्ध के झटके से अब तक नहीं उबर पाया है और निवेशकों के करोड़ों रुपये डूब चुके हैं।
युद्ध की जड़: क्या यह तीसरा विश्व युद्ध है?
यह संघर्ष दशकों पुराने इजरायल-फिलिस्तीन विवाद का विस्तार है। जहां अमेरिका खुलकर इजरायल के साथ खड़ा है, वहीं ईरान फिलिस्तीन के समर्थन में अब 'प्रॉक्सि वॉर' छोड़कर सीधे मैदान में आ गया है। पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशें भी अब तक नाकाम रही हैं।