नई दिल्ली. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को नई दिल्ली में एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि आतंकवाद को राज्य की नीति के रूप में इस्तेमाल करना पूरी तरह अस्वीकार्य है। इसे कभी उचित नहीं ठहराया जा सकता और न ही इसका कोई तर्कसंगत आधार हो सकता है। फिर भी यह जारी है। उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि आतंकवाद शांति के लिए घातक खतरा है। वैश्विक स्तर पर सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए मजबूत संकल्प की जरूरत है। भारत इस मुद्दे पर लगातार आवाज उठाता रहा है।
शून्य सहनशीलता पर जोर
जयशंकर ने उन देशों की आलोचना की जो आतंक को प्रश्रय देने वाले राज्यों के खिलाफ शून्य सहनशीलता दिखाने के बजाय राजनीतिक गणनाओं को आगे रखते हैं। उन्होंने कहा कि सभी देशों को आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता का रुख अपनाना चाहिए। राजनीतिक स्वार्थों को आतंक के खिलाफ लड़ाई से ऊपर नहीं रखा जा सकता। आतंकवाद किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। वैश्विक समुदाय को इस मुद्दे पर एकजुट होकर कठोर रुख अपनाना होगा। भारत की प्राथमिक चिंता पाकिस्तान से उत्पन्न आतंकवाद रही है।
द्विपक्षीय संबंधों पर असर का संकेत
इससे पहले जयशंकर ने अमेरिका का संकेत देते हुए कहा था कि यदि भारत के साझेदार यह पूरी तरह नहीं समझते कि पाकिस्तान से उत्पन्न आतंकवाद उसकी प्राथमिक चिंताओं में से एक है तो द्विपक्षीय संबंध प्रभावित होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। भारत के साझेदार देशों से अपेक्षा है कि वे इस गंभीर खतरे को समझें और समर्थन दें। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मानदंड नहीं होने चाहिए। सभी को समान रूप से सख्त रुख अपनाना चाहिए।
वैश्विक संकल्प की आवश्यकता
जयशंकर ने जोर दिया कि आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के खिलाफ मजबूत वैश्विक संकल्प जरूरी है। केवल बयानबाजी पर्याप्त नहीं है बल्कि ठोस कार्रवाई की जरूरत है। आतंक को प्रश्रय देने वाले राज्यों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाना होगा। वित्तीय नेटवर्क को काटना और आतंकियों को सुरक्षित पनाहगाह न देना महत्वपूर्ण है। भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाता रहा है। वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए आतंकवाद का समूल नाश जरूरी है।
राजनीतिक गणनाओं से ऊपर उठने की अपील
विदेश मंत्री ने कहा कि कुछ देश राजनीतिक गणनाओं को आतंक के खिलाफ शून्य सहनशीलता से ऊपर रख देते हैं। यह रवैया आतंकवाद को बढ़ावा देता है। उन्होंने अपील की कि सभी देश इस खतरे को गंभीरता से लें और राजनीतिक स्वार्थों से ऊपर उठकर कार्रवाई करें। आतंकवाद किसी एक देश की समस्या नहीं बल्कि पूरी मानवता के लिए खतरा है। इसलिए सामूहिक और निर्भीक प्रयास की जरूरत है। दोहरे मानदंड अपनाने से समस्या और जटिल होती है।
भारत का लगातार रुख
भारत ने हमेशा आतंकवाद के खिलाफ सख्त और स्पष्ट रुख अपनाया है। जयशंकर के बयान से यह संदेश फिर दोहराया गया कि आतंक को राज्य की नीति बनाने वाले देशों के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपेक्षा है कि वे भारत की चिंताओं को समझें और सहयोग करें। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कोई समझौता नहीं हो सकता। शांति और स्थिरता के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। भारत इस दिशा में अपनी भूमिका निभाता रहेगा।