जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची आज से तीन दिवसीय भारत दौरे पर आ रही हैं। इस दौरान उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय शिखर वार्ता होगी। दोनों नेताओं के बीच आर्थिक सहयोग, सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
2 जुलाई को होगी मोदी-तकाइची शिखर वार्ता
2 जुलाई को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सनाए तकाइची के बीच आधिकारिक शिखर बैठक आयोजित होगी। इसके अलावा जापानी प्रधानमंत्री भारत-जापान संयुक्त आर्थिक मंच (Joint Economic Forum) में भी भाग लेंगी, जहां व्यापार और निवेश से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा होगी।
आर्थिक सुरक्षा पर हो सकती है संयुक्त घोषणा
सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच आर्थिक सुरक्षा सहयोग को लेकर संयुक्त घोषणा जारी की जा सकती है। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में साझेदारी बढ़ाने पर संयुक्त बयान भी जारी होने की संभावना है। इस दौरान भारत और जापान के बीच करीब 10 महत्वपूर्ण समझौतों को अंतिम रूप दिया जा सकता है।
सेमीकंडक्टर, खनिज और फार्मा सहयोग पर रहेगा फोकस
बैठक में सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को मजबूत बनाने, महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विशेष चर्चा होगी। दोनों देश इन क्षेत्रों को भविष्य की आर्थिक और तकनीकी सुरक्षा के लिए बेहद अहम मानते हैं।
भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी लगातार हो रही मजबूत
भारत और जापान के रिश्ते पिछले एक दशक में लगातार मजबूत हुए हैं। वर्ष 2014 में दोनों देशों के संबंधों को 'विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी' का दर्जा दिया गया था। वर्ष 2027 में दोनों देश राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे करेंगे। इससे पहले दोनों सरकारें व्यापार, निवेश, रक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, संस्कृति और लोगों के बीच संपर्क को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही हैं।
70 से अधिक द्विपक्षीय संवाद तंत्र हैं सक्रिय
भारत और जापान के बीच वर्तमान में 70 से अधिक द्विपक्षीय संवाद तंत्र सक्रिय हैं, जिनके माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में नियमित सहयोग और विचार-विमर्श जारी है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2025 में टोक्यो का दौरा किया था, जहां दोनों देशों के बीच 15वें वार्षिक शिखर सम्मेलन का आयोजन हुआ था। यह मंच दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण माना जाता है।