रांची: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं (JPSC और JSSC) में कथित गड़बड़ी के खिलाफ जारी छात्रों के आंदोलन के 16वें दिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बड़ा बयान दिया है। रविवार को रांची में 'झारखंड आदिवासी महोत्सव' को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि घर की समस्याओं का समाधान 'लाठी-डंडा-बंदूक' से नहीं, बल्कि संवाद से ही संभव है। उन्होंने प्रदर्शनकारी युवाओं को पूर्ण पारदर्शिता के साथ न्याय दिलाने का भरोसा जताया।
"हथियार सीमा पर दुश्मनों के लिए होते हैं"
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने संबोधन में कहा कि हथियार सीमा पर देश के दुश्मनों के लिए होते हैं, अपने ही देश के युवाओं के खिलाफ बल प्रयोग से कुछ हासिल नहीं होता। उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि वहां युवाओं पर लाठीचार्ज हुआ और उन्हें राष्ट्रद्रोही तक कहा गया। सोरेन ने कहा कि उनकी सरकार में युवाओं को अपनी बात रखने का अधिकार है और किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
https://x.com/cseaspirant6/status/2086412470005198982
राजनीतिक हस्तक्षेप और भ्रम फैलाने की चेतावनी
राजनीतिक विरोधियों (विशेषकर बीजेपी) पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ निहित स्वार्थ और राजनीतिक दल झूठ और अफवाहें फैलाकर राज्य के युवाओं को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आंदोलनकारी छात्रों से अपील की कि वे अपने प्रदर्शन का राजनीतिकरण न होने दें और न ही किसी राजनीतिक संरक्षण की तलाश करें, क्योंकि न्याय पाना उनका अधिकार है।
दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा
हेमंत सोरेन ने स्पष्ट किया कि परीक्षा धांधली में शामिल पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, "हमने चोरी पकड़ी है, अब न्याय भी हमीं दिलाएंगे।" युवाओं की चिंता को अपनी चिंता बताते हुए उन्होंने कहा कि सरकार पारदर्शी जांच प्रक्रिया के तहत कदम उठा रही है।
16वें दिन भी जारी रहा आंदोलन, वार्ता का दौर शुरू
दूसरी ओर, रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों का आंदोलन 16वें दिन भी जारी रहा, जहां छह अभ्यर्थी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। गतिरोध को दूर करने के लिए रविवार को रांची स्टेट गेस्ट हाउस में सरकारी प्रतिनिधियों और आंदोलनकारियों के बीच छठे दौर की वार्ता हुई। छात्र जेपीएससी और जेएसएससी में सुधार के साथ-साथ इस मामले की सीबीआई या हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जजों की समिति से जांच की मांग कर रहे हैं।