कोलकाता: "मैं हमेशा सोचती थी कि राजनीति और राजनीतिक पार्टियाँ सिर्फ बड़े लोगों (अमीरों) के लिए होती हैं।" यह कहना है पश्चिम बंगाल के गुशकरा की रहने वाली कलिता माझी (Kalita Majhi) का, जो कभी राजनीति से कोसों दूर सिर्फ अपने परिवार का पेट पालने के लिए दूसरों के घरों में झाड़ू-पोछा और बर्तन मांजने का काम (परिचारिका) करती थीं। लेकिन वक्त बदला, किस्मत बदली और कलिता का अटूट संघर्ष रंग लाया। सोमवार को जब मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) के नए मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ, तो उसमें कलिता माझी ने भी राज्य के मंत्री के रूप में शपथ ली।
2021 में मिली थी हार, लेकिन पार्टी ने नहीं खोया भरोसा
कलिता माझी मूल रूप से मंगलकोट थाना क्षेत्र के एक बेहद गरीब परिवार से आती हैं और उनका ससुराल भी बेहद निर्धन रहा है। कलिता ने 'आजकल डॉट इन' को दिए एक इंटरव्यू में अपनी आपबीती साझा करते हुए कहा था, "हमारे पास पैसा या आलीशान घर भले नहीं था, लेकिन जो कुछ रूखा-सूखा आता था, हम उसमें बेहद खुश रहते थे। फिर अचानक राजनीति में आने का प्रस्ताव मिला।"
साल 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन पर भरोसा जताते हुए औशग्राम (Ausgram) सीट से टिकट दिया था, लेकिन वे 11,815 वोटों से चुनाव हार गईं। इसके बावजूद कलिता ने अगले 5 सालों तक जमीन पर काम करना बंद नहीं किया और न ही पार्टी ने उनसे भरोसा खोया। नतीजा यह हुआ कि 2026 के चुनाव में भाजपा ने उन्हें फिर मैदान में उतारा और इस बार उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार को 12,535 वोटों से शिकस्त देकर शानदार जीत दर्ज की।
"पिछली सरकार ने सिर्फ अपने लोगों की जेबें भरीं, जनता भूखी रही"
मंत्री पद की शपथ लेने से पहले ही कलिता माझी ने साफ कर दिया था कि एक जनप्रतिनिधि के रूप में उनका लक्ष्य क्या है। उन्होंने अपने इलाके के जंगलमहल का जिक्र करते हुए कहा, "पिछले 10-15 सालों में पूर्ववर्ती सरकार ने विकास तो किया, लेकिन सिर्फ अपने चहेते नेताओं का। टीएमसी के नेताओं ने अपने पॉकेट भरे, गाड़ियां और आलीशान मकान बनाए, लेकिन आम जनता के बारे में नहीं सोचा। मैंने खुद पैदल घूमकर देखा है; यहाँ न पीने का साफ पानी है, न सड़कें हैं, न पक्के मकान हैं और सबसे बड़ी बात, एक ढंग का स्वास्थ्य केंद्र (अस्पताल) तक नहीं है। यहाँ तक कि अगर जंगल में आग लग जाए, तो दमकल के लिए हमें दूसरी विधानसभा की मदद मांगनी पड़ती है। रोजगार के अभाव में लोग दाने-दाने को मोहताज हैं।"
गरीबों की आवाज बनेंगी कलिता माझी
कभी मुफलिसी में दिन काटने वाली कलिता माझी का सुवेंदु कैबिनेट में शामिल होना इस बात का सबूत है कि लोकतंत्र में एक आम और गरीब इंसान भी सत्ता के शीर्ष तक पहुँच सकता है। कलिता ने कसम खाई है कि वे अपने औशग्राम और पूरे बंगाल के गरीब, शोषित और वंचित समाज की भलाई के लिए दिन-रात काम करेंगी और बुनियादी सुविधाएं उन तक पहुँचाकर रहेंगी।