कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता और इसके उपनगरीय क्षेत्रों में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन ने बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। पिछले 24 घंटों के भीतर कोलकाता नगर निगम (KMC) और रेलवे प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई ने वर्षों से चले आ रहे अवैध कब्जों और निर्माणों पर शिकंजा कस दिया है। दमदम स्टेशन पर आधी रात को हॉकर्स के अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई, जबकि शहर की करीब 3,000 अवैध इमारतें अब प्रशासन के निशाने पर हैं।
दमदम स्टेशन पर आधी रात चला अभियान
शनिवार देर रात रेलवे प्रशासन, आरपीएफ और स्थानीय पुलिस की मौजूदगी में दमदम जंक्शन स्टेशन परिसर में अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया गया। प्लेटफॉर्म और स्टेशन के बाहर वर्षों से संचालित कई अस्थायी दुकानों और ठेलों को हटाकर क्षेत्र को खाली कराया गया। रविवार सुबह जब कई हॉकर अपने कारोबार के लिए पहुंचे, तो उन्हें केवल मलबा और बिखरा सामान ही दिखाई दिया। इस कार्रवाई से प्रभावित व्यापारियों में नाराजगी और चिंता का माहौल देखा गया।
3,000 अवैध इमारतों की पहचान
दमदम की कार्रवाई के साथ ही कोलकाता नगर निगम ने शहर में अवैध बहुमंजिला निर्माणों के खिलाफ भी सख्त रुख अपनाया है। निगम के सर्वे में करीब 3,000 अवैध निर्माणों की पहचान की गई है। गार्डेनरीच, मटियाबुर्ज, बड़ा बाजार, तिलजला, कसबा और तपसिया जैसे इलाकों को विशेष निगरानी क्षेत्र में रखा गया है। अधिकारियों के अनुसार इनमें से लगभग 1,000 इमारतों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और उन पर कभी भी कार्रवाई हो सकती है।
जांच में सामने आया सिंडिकेट मॉडल
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कई प्रमोटरों ने स्वीकृत नक्शे से अधिक मंजिलों का निर्माण किया। जहां जी+4 की अनुमति थी, वहां जी+6 और जी+7 तक भवन खड़े कर दिए गए। आरोप है कि इस तरह के निर्माणों के जरिए करोड़ों रुपये का अवैध कारोबार हुआ और निम्न गुणवत्ता वाली निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया गया। प्रशासन अब ऐसे मामलों की विस्तृत जांच कर रहा है।
राजनीतिक संरक्षण पर भी उठे सवाल
अवैध निर्माण और अतिक्रमण के मामलों में लंबे समय से राजनीतिक संरक्षण मिलने के आरोप लगते रहे हैं। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि अब सुरक्षा मानकों और शहरी नियोजन के नियमों से समझौता नहीं किया जाएगा।अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों की सुरक्षा और शहर के नियोजित विकास को प्रभावित करने वाले किसी भी अवैध निर्माण को बख्शा नहीं जाएगा।
फ्लैट खरीदारों की बढ़ी चिंता
प्रशासनिक कार्रवाई के बीच उन लोगों की चिंता भी बढ़ गई है जिन्होंने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी लगाकर इन इमारतों में फ्लैट खरीदे हैं। कई खरीदारों का कहना है कि उन्हें भवन की वैधता के बारे में पूरी जानकारी नहीं थी।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़े पैमाने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होती है तो इसका सबसे बड़ा असर उन परिवारों पर पड़ सकता है जिन्होंने वैध दस्तावेजों के भरोसे संपत्ति खरीदी थी।
आगे क्या?
कोलकाता नगर निगम और रेलवे प्रशासन का अभियान अभी शुरुआती चरण में माना जा रहा है। प्रशासन का दावा है कि आने वाले दिनों में अवैध निर्माणों और अतिक्रमण के खिलाफ और भी बड़े कदम उठाए जाएंगे। ऐसे में शहर के कई इलाकों में बुलडोजर कार्रवाई की आशंका से अवैध निर्माण से जुड़े लोगों में बेचैनी बढ़ गई है।