इंडियन नेवी का पाल वाला प्रशिक्षण पोत INS सुदर्शिनी 20 जनवरी को अपने फ्लैगशिप ट्रांसओशेनिक अभियान ‘लोकायन-26’ के लिए रवाना होगा। यह अभियान 10 महीनों तक चलेगा, जिसमें जहाज 22 हजार से अधिक नॉटिकल मील की समुद्री यात्रा करेगा। इस दौरान INS सुदर्शिनी 13 देशों के 18 प्रमुख बंदरगाहों पर पहुंचेगा, जहां भारत की नौसैनिक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों का प्रतिनिधित्व करेगा।
वसुधैव कुटुम्बकम की भावना समुद्रों तक
इंडियन नेवी के प्रवक्ता कैप्टन विवेक मधवाल के अनुसार, ‘लोकायन-26’ अभियान भारत की समृद्ध समुद्री विरासत और “वसुधैव कुटुम्बकम” की भावना को विश्व के महासागरों तक ले जाएगा। यह यात्रा केवल एक नौसैनिक अभियान नहीं, बल्कि भारत की सभ्यतागत सोच और वैश्विक भाईचारे के संदेश को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास है।
अंतरराष्ट्रीय टॉल-शिप आयोजनों में भागीदारी
इस लंबी समुद्री यात्रा के दौरान INS सुदर्शिनी दो प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय टॉल-शिप आयोजनों में भी हिस्सा लेगा। इनमें फ्रांस में आयोजित ‘एस्केल आ सेते’ और अमेरिका के न्यूयॉर्क में होने वाला ‘SAIL 250’ शामिल है। इन आयोजनों में INS सुदर्शिनी भारत की पारंपरिक नौकायन कला, नौसैनिक अनुशासन और समुद्री इतिहास का गौरवपूर्ण प्रदर्शन करेगा।
200 से अधिक ट्रेनी को मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण
‘लोकायन-26’ अभियान का एक प्रमुख उद्देश्य प्रशिक्षण भी है। इस दौरान इंडियन नेवी और इंडियन कोस्ट गार्ड के 200 से अधिक ट्रेनी पाल वाले जहाज पर गहन सेल ट्रेनिंग से गुजरेंगे। उन्हें पारंपरिक नौकायन, समुद्री नेविगेशन और लंबी समुद्री यात्राओं की व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी, जो आधुनिक नौसेना के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
वैश्विक संवाद और पेशेवर आदान-प्रदान
इस अभियान के दौरान INS सुदर्शिनी विभिन्न मित्र देशों की नेवी के ट्रेनी और अधिकारियों के साथ संवाद और संयुक्त गतिविधियों में भाग लेगा। इससे न केवल पेशेवर अनुभव साझा होंगे, बल्कि आपसी समझ, मित्रता और सहयोग भी मजबूत होगा। ऐसे कार्यक्रम नौसैनिक कूटनीति का अहम हिस्सा माने जाते हैं।
18 बंदरगाहों पर समुद्री साझेदारी का विस्तार
INS सुदर्शिनी की यह यात्रा केवल प्रशिक्षण और प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगी। 18 बंदरगाहों पर रुककर यह जहाज मित्र देशों की नेवी के साथ ट्रेनिंग इंटरेक्शन, समुद्री साझेदारी और सहयोग कार्यक्रमों में भी भाग लेगा। यह पहल MAHASAGAR विजन को आगे बढ़ाने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सहयोग को सशक्त करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
सांस्कृतिक कूटनीति का सशक्त प्रतीक
‘लोकायन-26’ अभियान को सांस्कृतिक कूटनीति का एक प्रभावी माध्यम माना जा रहा है। समुद्र के रास्ते भारत का यह संदेश—सहयोग, विश्वास और साझेदारी—मित्र देशों तक पहुंचेगा। INS सुदर्शिनी की यह यात्रा भारत की सॉफ्ट पावर और समुद्री नेतृत्व को वैश्विक मंच पर और मजबूत करने वाली साबित हो सकती है।
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