नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण को लेकर एक अहम और ऐतिहासिक पहल की है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी गई है। इस संशोधन के तहत लोकसभा की कुल सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव है, जिनमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
अप्रैल में संसद का विशेष सत्र, इसी महीने बिल पारित होने की उम्मीद
सरकार ने बजट सत्र का विस्तार करते हुए 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है। इस दौरान महिला आरक्षण संशोधन बिल को संसद से पारित कराए जाने की संभावना है। संसद की मंजूरी के बाद यह कानून 31 मार्च 2029 से लागू होगा और उसी वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव तथा कुछ राज्यों के विधानसभा चुनावों में पहली बार प्रभावी होगा।
SC-ST आरक्षित सीटों पर भी लागू होगा महिला आरक्षण
संशोधन प्रस्ताव के अनुसार महिला आरक्षण वर्टिकल आधार पर लागू किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों में भी महिलाओं के लिए निर्धारित अनुपात में आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा।
परिसीमन कानून में बदलाव के लिए अलग बिल लाएगी सरकार
सरकार इस संशोधन बिल के साथ-साथ परिसीमन कानून में संशोधन के लिए एक अलग साधारण बिल भी लाने की तैयारी में है। इसके जरिए लोकसभा और विधानसभा सीटों का नए सिरे से निर्धारण किया जाएगा। संकेत हैं कि नया परिसीमन 2027 की बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर किया जा सकता है।
राज्यों की विधानसभाओं और केंद्र शासित प्रदेशों में भी लागू होगा कानून
महिला आरक्षण का यह प्रावधान केवल लोकसभा तक सीमित नहीं रहेगा। इसे राज्यों की विधानसभाओं के साथ-साथ दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में भी लागू किया जाएगा, ताकि सभी स्तरों पर महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाई जा सके।
महिला आरक्षण के बाद उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा सीटें बढ़ने की संभावना
महिला आरक्षण और परिसीमन के बाद उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा लोकसभा सीटें बढ़ सकती हैं। यहां सीटों की संख्या 80 से बढ़कर 120 होने का अनुमान है, जिनमें करीब 40 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। महाराष्ट्र में लोकसभा सीटें 48 से बढ़कर 72 हो सकती हैं, जिनमें 24 सीटें महिलाओं को मिलेंगी। बिहार में कुल सीटें 60 तक पहुंच सकती हैं, जिनमें लगभग 20 महिला आरक्षित होंगी। मध्य प्रदेश में 15, तमिलनाडु में 20, दिल्ली में 4 और झारखंड में 7 महिला आरक्षित सीटें बढ़ने का अनुमान है।
1931 से शुरू हुई महिला आरक्षण की लंबी यात्रा
भारत में महिला आरक्षण का मुद्दा पहली बार 1931 में भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान उठा था। इसके बाद 1974 में पंचायत और नगर निकायों में महिलाओं को आरक्षण देने की सिफारिश की गई। वर्ष 1993 में 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के जरिए पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू हुआ। बाद में कई राज्यों ने इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक कर दिया।
2023 में संसद से पारित हुआ था नारी शक्ति वंदन अधिनियम
20 सितंबर 2023 को लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया गया था। उस समय इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम माना गया था। अब संशोधन ड्राफ्ट को मंजूरी मिलने के बाद इसके प्रभावी क्रियान्वयन का रास्ता साफ होता दिख रहा है।