पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन अब कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ गए हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मालदा हिंसा मामले की जांच तेज करते हुए 40 बीएलओ (BLO) को तलब किया है, जबकि न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने की घटना को लेकर कई अहम खुलासों की तैयारी चल रही है।
जांच में तेजी
सूत्रों के मुताबिक, NIA ने मामले की जांच को तीन हिस्सों में बांट दिया है। एक टीम बीडीओ कार्यालय, दूसरी घटनास्थल और तीसरी संबंधित थानों में जांच कर रही है। अब तक 22 बीएलओ से पूछताछ हो चुकी है और बाकी को भी नोटिस जारी किया गया है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि भीड़ कैसे इकट्ठा हुई और इसके पीछे किसकी भूमिका थी।
बंधक बनाए गए थे अधिकारी
मालदा के मोथाबाड़ी और कालियाचक इलाके में विरोध के दौरान सात न्यायिक अधिकारियों को घंटों तक घेरकर रखा गया था। इस घटना को गंभीर मानते हुए NIA ने मौके का निरीक्षण कर सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान जुटाए हैं। मुख्य आरोपी मोफक्करुल इस्लाम को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
प्रशासनिक लापरवाही पर कार्रवाई
घटना के बाद जिला प्रशासन भी सख्त हुआ है। जिला मजिस्ट्रेट ने अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (कानून-व्यवस्था) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, क्योंकि समय पर उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट नहीं भेजी गई थी।
महिला BLO पर FIR
इस बीच भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर कोलकाता में सीईओ ऑफिस के सामने प्रदर्शन करने वाली महिला BLO तनुश्री मोदक भट्टाचार्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। उन्हें हरे स्ट्रीट थाने में पेश होने का नोटिस दिया गया है।
गिरफ्तारी की चेतावनी
पुलिस ने नोटिस में साफ किया है कि जांच में सहयोग न करने, सबूत नष्ट करने या बाधा डालने की स्थिति में गिरफ्तारी की जा सकती है। साथ ही भविष्य में ऐसे विरोध प्रदर्शनों से दूर रहने की हिदायत भी दी गई है।
राजनीतिक तकरार भी तेज
घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। प्रदर्शन के दौरान भाजपा समर्थकों की मौजूदगी और नारेबाजी को लेकर शिकायत दर्ज की गई थी, जिसके बाद माहौल और गरमा गया है।
मालदा हिंसा मामला अब सिर्फ स्थानीय विरोध नहीं, बल्कि संगठित साजिश की दिशा में जांच का केंद्र बनता जा रहा है। NIA की रिपोर्ट आने के बाद इस केस में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।