बांग्ला साहित्य के प्रख्यात लेखक मणि शंकर मुखर्जी का कोलकाता के एक अस्पताल में 93 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनकी रचनाओं ने मानवीय संवेदना, सामाजिक यथार्थ और आंतरिक संघर्षों को जिस गहराई से अभिव्यक्त किया, वह उन्हें युगांतरकारी साहित्यकारों की श्रेणी में स्थापित करता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने व्यक्त की गहरी संवेदना
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि मणि शंकर मुखर्जी बांग्ला साहित्य के महानायक थे, जिनकी लेखनी ने अनेक पीढ़ियों को प्रभावित किया। उन्होंने लिखा कि शंकर की कृतियाँ मानव जीवन की संवेदनाओं, संघर्षों और अनुभूतियों का सजीव चित्रण करती हैं, जो पाठकों को हमेशा प्रेरित करती रहेंगी।
शंकर की रचनाओं की विशिष्टता
मणि शंकर मुखर्जी की रचनाओं की प्रमुख विशेषता उनका सहज, सरल और मानवीय दृष्टिकोण था। उनकी कहानियाँ समाज के यथार्थ को बिना किसी कृत्रिमता के सामने रखती थीं। उनकी कालजयी कृतियों ने साहित्य को नई दिशा दी और उन्हें बांग्ला भाषा के ‘शिखर पुरुष’ के रूप में स्थापित किया। कई कृतियाँ फिल्मों और धारावाहिकों के रूप में भी लोकप्रिय हुईं।
साहित्य जगत में शोक की लहर
उनके निधन की खबर फैलते ही साहित्यकारों, पाठकों और प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई। बांग्ला ही नहीं, बल्कि भारतीय साहित्य को उन्होंने जो समृद्धि प्रदान की, वह अमूल्य है। साहित्य-जगत में उत्पन्न यह रिक्तता लंबे समय तक महसूस की जाएगी। उनकी लेखनी ने पाठकों के मन-मस्तिष्क पर अमिट छाप छोड़ी है।
परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना
प्रधानमंत्री सहित देशभर के बुद्धिजीवियों, साहित्य प्रेमियों और सांस्कृतिक जगत के लोगों ने मुखर्जी के परिवार और समर्थकों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। उनका साहित्यिक योगदान आने वाली अनेक पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। उनका जाना भारतीय साहित्य के लिए अपूरणीय क्षति है।
Comments (0)