नई दिल्ली. मणिशंकर अय्यर ने तमिलनाडु की ताजा राजनीतिक स्थिति को लेकर कांग्रेस नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने लंबे समय पुराने सहयोगी DMK को नजरअंदाज कर अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी TVK का समर्थन करके राजनीतिक अवसरवाद का परिचय दिया है। अय्यर के अनुसार यह फैसला गठबंधन की मूल भावना और राजनीतिक नैतिकता दोनों के खिलाफ है।
‘सत्ता के लिए सिद्धांत छोड़े जा रहे’
अय्यर ने कांग्रेस की रणनीति को “लो पॉलिटिकल ऑपर्च्युनिज्म” बताते हुए कहा कि केवल सत्ता हासिल करने के लिए दशकों पुराने सहयोगियों को छोड़ देना पार्टी की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाता है। उनका मानना है कि विपक्षी गठबंधन की मजबूती भरोसे और दीर्घकालिक साझेदारी पर आधारित होनी चाहिए, न कि तत्काल राजनीतिक लाभ पर। इस बयान के बाद INDIA गठबंधन के भीतर नई बहस शुरू हो गई है।
राहुल गांधी के नेतृत्व पर फिर उठे सवाल
राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर भी मणिशंकर अय्यर ने खुलकर टिप्पणी की। उन्होंने लगातार चुनावी हार और संगठनात्मक कमजोरियों का जिक्र करते हुए कहा कि अब कांग्रेस को अपनी भूमिका पर पुनर्विचार करने की जरूरत है। अय्यर के मुताबिक पार्टी को पीछे हटकर ऐसे नेताओं को आगे लाना चाहिए, जिनकी अपने-अपने राज्यों में मजबूत पकड़ और जनाधार हो।
ममता, स्टालिन और अखिलेश जैसे नेताओं का लिया नाम
अय्यर ने विपक्षी गठबंधन के नेतृत्व के लिए ममता बनर्जी, एम.के. स्टालिन, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव जैसे नेताओं का नाम सुझाया। उनका कहना है कि ये क्षेत्रीय नेता अपनी जमीन, सामाजिक समीकरण और जनता की अपेक्षाओं को बेहतर ढंग से समझते हैं। इसलिए विपक्षी राजनीति को मजबूत करने में उनकी भूमिका अधिक प्रभावी हो सकती है।
क्षेत्रीय दलों को बताया INDIA गठबंधन की ताकत
मणिशंकर अय्यर का मानना है कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में क्षेत्रीय दल विपक्ष की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में कांग्रेस की पकड़ कमजोर हुई है, जबकि क्षेत्रीय दल अपने राज्यों में मजबूत स्थिति बनाए हुए हैं। ऐसे में यदि INDIA गठबंधन को भविष्य में मजबूत और प्रभावी बनाना है, तो क्षेत्रीय नेतृत्व को अधिक महत्व देना होगा।
बयान से बढ़ सकती है कांग्रेस की मुश्किल
अय्यर का यह बयान ऐसे समय आया है, जब विपक्षी दलों के बीच सीट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर पहले से ही अंदरूनी खींचतान की चर्चाएं चल रही हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के सार्वजनिक बयान कांग्रेस के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकते हैं। साथ ही इससे विपक्षी गठबंधन के भीतर नेतृत्व को लेकर नई बहस और तेज होने की संभावना भी बढ़ गई है।
INDIA गठबंधन के भविष्य पर बढ़ी चर्चा
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार मणिशंकर अय्यर का बयान केवल व्यक्तिगत राय नहीं, बल्कि विपक्षी राजनीति के भीतर चल रही बेचैनी का संकेत भी माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इन टिप्पणियों पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है और INDIA गठबंधन की आंतरिक राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।