नई दिल्ली. भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की सफलता के बाद अब सरकार मेथेनॉल पर ध्यान केंद्रित कर रही है। देश में जहाजों को पर्यावरण के अनुकूल ईंधन पर लाने के लिए मेथेनॉल के इस्तेमाल को प्राथमिकता दी जा सकती है। ग्रीन ट्रांजिशन यानी पर्यावरण अनुकूल बदलाव की योजना के तहत मेथेनॉल को पहली प्राथमिकता मिलने की संभावना है। सरकार टैक्स में छूट देने बंदरगाहों पर ईंधन की कीमतें एक समान रखने और मंजूरी की प्रक्रिया आसान बनाने जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है। इससे जहाजों में मेथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ावा मिल सकता है। यह कदम ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण दोनों दिशाओं में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जहाजों में मेथेनॉल के इस्तेमाल पर फोकस
सरकार जहाजों में पारंपरिक ईंधन की जगह मेथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ावा दे सकती है। बंदरगाह जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय तथा डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग ने जहाजों में मेथेनॉल के इस्तेमाल को लेकर अध्ययन शुरू किया है। अध्ययन के तहत भारतीय बंदरगाहों पर मेथेनॉल भरवाने वाले जहाजों के लिए सुविधाएं बेहतर बनाने और बंदरगाहों पर लगने वाले शुल्क में एकरूपता लाने के सुझाव दिए गए हैं। मेथेनॉल को स्वच्छ ईंधन के रूप में देखा जा रहा है जो कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद कर सकता है। शिपिंग क्षेत्र में हरित ईंधन की मांग वैश्विक स्तर पर बढ़ रही है। भारत इस दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है।
टैक्स छूट और सुविधाओं पर विचार
सरकार भारतीय बंदरगाहों पर मेथेनॉल की कीमत एक समान रखने पर विचार कर रही है। जहाजों में ईंधन भरने की प्रक्रिया तेज करने और मेथेनॉल रिफ्यूलिंग सुविधाएं बनाने के लिए जरूरी मंजूरियां जल्दी देने के विकल्प भी देखे जा रहे हैं। इसका मकसद जहाजों का बंदरगाहों पर लगने वाला समय कम करना है। अगर ईंधन की कीमतें और नियम अलग-अलग बंदरगाहों पर एक जैसे होंगे तो शिपिंग कंपनियों के लिए मेथेनॉल का इस्तेमाल आसान हो सकता है। टैक्स छूट से लागत कम होने की उम्मीद है। ये कदम मेथेनॉल आधारित जहाजरानी को व्यावहारिक बनाने में मदद करेंगे।
अध्ययन और सुझावों का महत्व
बंदरगाह जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय तथा डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग द्वारा शुरू किए गए अध्ययन में मेथेनॉल की सुविधाओं को लेकर विस्तृत सुझाव दिए गए हैं। बंदरगाहों पर मेथेनॉल भरवाने की व्यवस्था को मजबूत करने और शुल्क संरचना में एकरूपता लाने पर जोर दिया गया है। इससे विदेशी और घरेलू जहाजों दोनों को लाभ मिलेगा। अध्ययन के नतीजे नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। सरकार इन सुझावों के आधार पर आगे की रणनीति तय करेगी। शिपिंग क्षेत्र में हरित ईंधन अपनाने की दिशा में यह अध्ययन आधार तैयार कर रहा है।
घरेलू उत्पादन की संभावना
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में जीवाश्म ईंधन का आयात करता है। मेथेनॉल का उत्पादन देश में भी किया जा सकता है। खेती से निकलने वाले अवशेषों का इस्तेमाल करके मेथेनॉल बनाया जा सकता है। घरेलू उत्पादन बढ़ने से मेथेनॉल की उपलब्धता बेहतर हो सकती है। हालांकि उत्पादन के साथ-साथ ईंधन के भंडारण और बंदरगाहों तक पहुंचाने की सुविधाएं विकसित करना भी जरूरी होगा। कृषि अवशेषों से मेथेनॉल बनाने से किसानों को भी अतिरिक्त आय का स्रोत मिल सकता है। यह आत्मनिर्भरता की दिशा में सकारात्मक कदम साबित हो सकता है।
विदेशी जहाजों से मांग बढ़ने की उम्मीद
अंतरराष्ट्रीय कंटेनर जहाजों का भारतीय बंदरगाहों पर नियमित रूप से आना मेथेनॉल की मांग बढ़ाने में मदद कर सकता है। इससे ईंधन आपूर्तिकर्ताओं को मेथेनॉल के उत्पादन भंडारण और जहाजों में ईंधन भरने की सुविधाओं में निवेश करने का भरोसा मिलेगा। सरकार वैकल्पिक ईंधन की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने पर काम कर रही है। मेथेनॉल आधारित जहाजरानी के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार करने का काम भी शुरू हो चुका है। हालांकि योजना अभी विचार के स्तर पर है। टैक्स छूट नियमों में बदलाव और नई सुविधाओं को लेकर अंतिम फैसला होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि भारत में जहाजों के लिए मेथेनॉल का इस्तेमाल कब और कितनी तेजी से बढ़ेगा।