काठमांडू/नई दिल्ली। नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान तेज हो गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने नेपाल के लिए 1.5 लाख अमेरिकी डॉलर की तत्काल सहायता जारी की है। संगठन ने कहा है कि जरूरतों के आकलन के आधार पर आगे और संसाधन उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
WHO ने भेजी 10 हजार लोगों के लिए स्वास्थ्य सामग्री
WHO के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस के मुताबिक, आपदा के कुछ ही घंटों के भीतर संगठन ने नेपाल में आपातकालीन स्वास्थ्य सामग्री भेजना शुरू कर दिया था। इसमें ऐसी स्वास्थ्य आपूर्ति शामिल है, जिससे करीब 10 हजार लोगों को तीन महीने तक जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई जा सकती है। इसके अलावा टेंट, 10 हजार मास्क, दस्ताने और हैंड सैनिटाइजर भी भेजे गए हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं की बहाली WHO की प्राथमिकता
WHO ने कहा कि इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता बाढ़ प्रभावित समुदायों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना और बाधित स्वास्थ्य सेवाओं को जल्द बहाल करना है। संगठन नेपाली सरकार के नेतृत्व में जन स्वास्थ्य की निगरानी, विभिन्न साझेदारों के बीच समन्वय और तकनीकी सहायता भी उपलब्ध करा रहा है। WHO ने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों के सामने गंभीर चुनौतियां हैं और ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय साझेदारों का लगातार सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है।
भारत ने भेजी तीसरी राहत उड़ान
नेपाल में राहत अभियान के बीच भारत ने भी अपनी सहायता बढ़ा दी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, 10 टन मानवीय सहायता सामग्री लेकर भारत की तीसरी विशेष उड़ान काठमांडू पहुंची है। इस खेप में पोर्टेबल जनरेटर सेट, डिग्निटी किट, खाद्य पैकेट और जल शोधन की गोलियां शामिल हैं।
11 सदस्यीय मेडिकल और टनल रेस्क्यू टीम भी पहुंची
विदेश मंत्री एस. जयशंकर के मुताबिक, तीसरी उड़ान में 11 सदस्यीय डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मियों की टीम के साथ सुरंग बचाव अभियान के लिए रेकी टीम भी भेजी गई है। टीम नेपाल के राहत एवं बचाव प्रयासों में सहयोग करेगी।
भारत इससे पहले भी नेपाल को राहत सामग्री भेज चुका है। आकाशवाणी के अनुसार, तीसरी खेप से पहले भारत की दो उड़ानों के जरिए 47 टन से अधिक आपातकालीन राहत सामग्री भेजी जा चुकी थी।
नेपाल के साथ खड़े हैं भारत और WHO
नेपाल में बाढ़ से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। WHO स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में जुटा है, जबकि भारत मानवीय सहायता, चिकित्सा संसाधनों और राहत सामग्री के जरिए नेपाल के प्रयासों में सहयोग कर रहा है।