नई दिल्ली. देश की नीति निर्माण प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाने वाले नीति आयोग में नए नेतृत्व का गठन किया गया है। वरिष्ठ अर्थशास्त्री डॉ. अशोक कुमार लाहिड़ी को आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. गोबर्धन दास को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। इस नियुक्ति के साथ ही नीति आयोग को आर्थिक और वैज्ञानिक दृष्टि से मजबूत नेतृत्व मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
प्रधानमंत्री से मुलाकात के साथ नई जिम्मेदारी की शुरुआत
नियुक्ति के बाद डॉ. अशोक लाहिड़ी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और आगामी कार्यों को लेकर चर्चा की। यह मुलाकात केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि देश के विकास की दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण संवाद का हिस्सा मानी जा रही है। प्रधानमंत्री के विकसित भारत के विजन को साकार करने में अब लाहिड़ी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी।
चार दशकों का व्यापक आर्थिक अनुभव
डॉ. लाहिड़ी भारत के सबसे अनुभवी अर्थशास्त्रियों में गिने जाते हैं और उनका चार दशकों से अधिक का करियर रहा है। उन्होंने मुख्य आर्थिक सलाहकार, वित्त आयोग के सदस्य जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। इसके अलावा एशियाई विकास बैंक, विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसे वैश्विक संस्थानों में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनका यह व्यापक अनुभव नीति आयोग के कार्यों को नई दिशा देने में सहायक होगा।
शिक्षा और बौद्धिक पृष्ठभूमि की मजबूत नींव
डॉ. लाहिड़ी ने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय से अपनी शिक्षा प्राप्त की है। कोलकाता के निवासी होने के नाते वे बंगाल की बौद्धिक परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके अनुभव और ज्ञान का लाभ देश के समग्र विकास के लिए उठाया जाएगा, विशेष रूप से आर्थिक नीतियों के क्षेत्र में।
विज्ञान के क्षेत्र से डॉ. गोबर्धन दास का योगदान
नीति आयोग के नए सदस्य डॉ. गोबर्धन दास आणविक विज्ञान के एक प्रतिष्ठित प्रोफेसर हैं, जिन्होंने प्रतिरक्षा विज्ञान, संक्रामक रोग और कोशिका जीव विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। तपेदिक के रोगजनन पर उनके शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। उनके जुड़ने से नीति आयोग में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
वैश्विक अनुभव के साथ देश सेवा का संकल्प
डॉ. दास ने अमेरिका और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में उच्च स्तरीय अनुसंधान कार्यों का नेतृत्व किया है। येल विश्वविद्यालय, ह्यूस्टन मेथोडिस्ट अस्पताल और क्वाज़ुलु-नताल विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में कार्य करने के बाद उन्होंने भारत लौटकर देश सेवा का मार्ग चुना। यह निर्णय उनकी प्रतिबद्धता और राष्ट्र के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
संघर्ष और सफलता की प्रेरणादायक कहानी
डॉ. गोबर्धन दास का जीवन संघर्ष और सफलता का अनूठा उदाहरण है। बांग्लादेश से आए एक दलित शरणार्थी परिवार में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने कठिन परिस्थितियों को पार करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। वर्तमान में वे आईआईएसईआर भोपाल के निदेशक के रूप में कार्यरत हैं और उनकी यह यात्रा युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
नीति निर्माण में नए आयाम की उम्मीद
डॉ. अशोक लाहिड़ी और डॉ. गोबर्धन दास की नियुक्ति के साथ नीति आयोग को अनुभवी और दूरदर्शी नेतृत्व मिला है। आर्थिक नीतियों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के इस संयोजन से देश के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। यह बदलाव भारत को वैश्विक मंच पर और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।