नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने प्याज उत्पादकों की आय को मजबूत करने और कृषि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से सरकारी खरीद मूल्य को 1,875 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 2,125 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। नई दर तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। उपभोक्ता मामले मंत्रालय के अनुसार यह खरीद राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED) और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (NCCF) के माध्यम से मूल्य स्थिरीकरण बफर योजना के अंतर्गत की जा रही है। सरकार का मानना है कि बढ़ी हुई खरीद कीमत किसानों को बेहतर प्रतिफल उपलब्ध कराएगी और सरकारी बफर स्टॉक को समय पर मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। कृषि अर्थशास्त्रियों के अनुसार यह कदम बाजार में मूल्य संतुलन बनाए रखने और किसानों के हितों की रक्षा करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
उत्पादन सामान्य रहने से उपलब्धता को लेकर नहीं है चिंता
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के द्वितीय अग्रिम अनुमान के अनुसार वर्ष 2025-26 में देश में प्याज का उत्पादन लगभग 307.37 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के उत्पादन 307.67 लाख मीट्रिक टन के लगभग बराबर है। विशेषज्ञों का कहना है कि उत्पादन में स्थिरता देश की खाद्य आपूर्ति श्रृंखला के लिए सकारात्मक संकेत है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान उत्पादन अनुमान को देखते हुए देश में प्याज की कुल उपलब्धता पर्याप्त बनी हुई है और आपूर्ति संकट जैसी कोई स्थिति नहीं है। हालांकि मानसून, परिवहन तथा मौसमी उतार-चढ़ाव के कारण कीमतों में सीमित अवधि के लिए हल्का परिवर्तन संभव है, जिसे नियंत्रित करने के लिए सरकार लगातार बाजार की निगरानी कर रही है।
महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और गुजरात में पर्याप्त भंडार, मंडियों में बनी हुई है अच्छी आवक
सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों विशेषकर महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और गुजरात में प्याज का भंडारण संतोषजनक स्तर पर बना हुआ है। मंत्रालय ने कहा है कि वर्तमान में संग्रहित प्याज की उपलब्धता में किसी प्रकार की कमी के संकेत नहीं मिले हैं। देशभर की कृषि उपज मंडियों में प्रतिदिन 50,000 मीट्रिक टन से अधिक प्याज की आवक दर्ज की जा रही है, जबकि अकेले महाराष्ट्र में यह मात्रा 30,000 मीट्रिक टन से अधिक बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छी गुणवत्ता वाला बड़ा स्टॉक अभी भी कोल्ड स्टोरेज और गोदामों में सुरक्षित रखा गया है, जिसे कम आपूर्ति वाले महीनों में चरणबद्ध तरीके से बाजार में उतारा जाएगा। इससे भविष्य में कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव की संभावना कम होगी।
निर्यात में प्रतिस्पर्धा बढ़ी, लेकिन घरेलू बाजार की स्थिति संतुलित
सरकार के अनुसार जून माह में लगभग 1.50 लाख मीट्रिक टन प्याज का निर्यात किया गया, जिससे स्पष्ट होता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय प्याज की मांग बनी हुई है। हालांकि व्यापार जगत का अनुमान है कि आगामी महीनों में निर्यात की गति कुछ धीमी पड़ सकती है, क्योंकि पाकिस्तान और चीन की नई फसलें खाड़ी देशों, श्रीलंका तथा सुदूर पूर्व के बाजारों में प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध हो रही हैं। इसके बावजूद घरेलू बाजार में फिलहाल औसत खुदरा मूल्य लगभग 31 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बना हुआ है और प्रमुख उपभोक्ता बाजारों में मांग एवं आपूर्ति के बीच संतुलन देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की सक्रिय बफर नीति घरेलू उपभोक्ताओं और किसानों दोनों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखने में सहायक सिद्ध हो सकती है।
मानसून की चाल पर टिकी रहेगी आगे की बाजार स्थिति
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि आगामी महीनों में मानसून की प्रगति प्याज उत्पादन और कीमतों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। नासिक क्षेत्र में खरीफ बुआई लगभग पंद्रह दिन विलंब से शुरू हुई है, जबकि कर्नाटक के चित्रदुर्ग और चल्लकेरे क्षेत्रों में बुआई सामान्य स्तर के लगभग साठ प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। कुछ क्षेत्रों में वर्षा में देरी और सामान्य से कम बारिश के कारण सीमित स्तर पर सट्टा आधारित खरीदारी देखने को मिली है, लेकिन उपभोक्ता बाजारों में वर्तमान कीमतों पर मांग स्थिर बनी हुई है। कृषि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून सामान्य रहता है और सरकारी खरीद प्रभावी ढंग से जारी रहती है, तो आने वाले महीनों में प्याज की उपलब्धता और कीमतों में व्यापक स्थिरता बनाए रखना संभव होगा। इससे किसानों को बेहतर आय प्राप्त होगी और उपभोक्ताओं को भी अनावश्यक मूल्य वृद्धि से राहत मिलेगी।