नई दिल्ली - भारत की राष्ट्रीय हॉकी टीम की जर्सी के रंग में बदलाव को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल प्रतीकों को बदलने में लगी है, जबकि देश के युवाओं के असली मुद्दों की अनदेखी की जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने छात्र आंदोलन के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा।
'जर्सी बदलने से नहीं बदलेगी देश की सोच'
मीडिया से बातचीत में प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार चाहे हॉकी टीम की जर्सी का रंग बदले या शिक्षा नीति के जरिए इतिहास को नए तरीके से पेश करने की कोशिश करे, लेकिन इससे देश के युवाओं की सोच नहीं बदलेगी। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर छात्रों की आवाज पूरे देश की भावनाओं को दर्शाती है और युवाओं के सवालों का जवाब देना सरकार की जिम्मेदारी है।
RSS के इतिहास पर भी उठाए सवाल
प्रियंका गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि देश की आजादी की लड़ाई सत्य, अहिंसा और भाईचारे के मूल्यों पर लड़ी गई थी। उन्होंने दावा किया कि स्वतंत्रता संग्राम में RSS की कोई भूमिका नहीं थी और पूरा देश इस ऐतिहासिक तथ्य से परिचित है। उनके अनुसार भारत की असली पहचान एकता, प्रेम और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ी हुई है, जिसे कोई भी कमजोर नहीं कर सकता।
'देश की आत्मा भाईचारे में बसती है'
कांग्रेस सांसद ने कहा कि महात्मा गांधी के नेतृत्व में देश ने स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी और आज भी भारत की ताकत उसकी विविधता और भाईचारे में है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिशें लंबे समय तक सफल नहीं होंगी, क्योंकि देश की आत्मा आपसी विश्वास और एकता पर आधारित है।
पैलेट गन विवाद पर सरकार से मांगा जवाब
प्रियंका गांधी ने हाल के छात्र आंदोलन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जिन छात्रों के शरीर पर पैलेट के निशान दिखाई दिए, उनके लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि यदि पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं हुआ, तो छात्रों को ऐसी चोटें कैसे लगीं। उन्होंने सरकार से पूरे घटनाक्रम पर स्पष्ट और पारदर्शी जवाब देने की मांग की।
राजनीतिक बयानबाज़ी के बीच बढ़ी बहस
हॉकी जर्सी के रंग में बदलाव और छात्र आंदोलन को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगातार तेज हो रहे हैं। जहां विपक्ष इसे वैचारिक और लोकतांत्रिक मुद्दा बता रहा है, वहीं सरकार की ओर से इस पर अलग रुख सामने आ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद संसद और राजनीतिक गलियारों में और गर्माने की संभावना है।