नई दिल्ली- कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने छात्रों के आंदोलन और संसद में जारी विपक्ष के विरोध प्रदर्शन को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगें पूरी तरह जायज हैं और शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतंत्र का हिस्सा है। प्रियंका ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की आवाज दबा रही है और संसद में भी विपक्ष के साथ अलोकतांत्रिक व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने शिक्षा, पेपर लीक और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर केंद्र सरकार को घेरा।
'शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतंत्र का अधिकार'
मीडिया से बातचीत में प्रियंका गांधी ने कहा कि छात्र अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं और उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में कुछ भी गलत या अलोकतांत्रिक नहीं है, लेकिन छात्रों और विपक्षी सांसदों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया जा रहा है, वह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
पेपर लीक और शिक्षा बजट पर सरकार को घेरा
प्रियंका गांधी ने कहा कि देश में बार-बार पेपर लीक की घटनाएं हो रही हैं, जिससे युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने शिक्षा बजट और सरकारी प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि छात्रों की समस्याओं के समाधान के बजाय सरकार बड़े उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने में व्यस्त है।
संसद परिसर में काले कपड़ों में विपक्ष का प्रदर्शन
बुधवार को संसद परिसर में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने काले कपड़े पहनकर विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी नेता शामिल हुए। विपक्ष ने सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं की अनदेखी और विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया।
खरगे का सरकार पर बड़ा आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान नहीं किया जा रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई के बीच भाजपा-आरएसएस से जुड़े लोग भी मौजूद थे। खरगे ने कहा कि यदि विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश जारी रही तो देशभर में इसका व्यापक विरोध होगा।
क्या है पूरा मामला?
20 जुलाई को CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) द्वारा आयोजित 'संसद चलो' प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकते हुए कार्रवाई की थी। विपक्ष का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया, जबकि सरकार की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कही गई।