आज देशभर में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई जा रही है। पश्चिम बंगाल में ‘पोन्चीशे बोइशाख’ के रूप में प्रसिद्ध रवींद्र जयंती इस साल 9 मई को मनाई जा रही है। साहित्य, संगीत, शिक्षा और कला के क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ने वाले टैगोर की यह 165वीं जयंती है। देशभर के स्कूलों, विश्वविद्यालयों और सांस्कृतिक संस्थानों में कविता पाठ, रवींद्र संगीत, नृत्य-नाटिका और विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता के जोरासांको ठाकुरबाड़ी में हुआ था। उनके पिता देवेंद्रनाथ टैगोर और माता शारदा देवी थीं। बंगाली कैलेंडर के अनुसार उनका जन्म बोइशाख महीने के 25वें दिन हुआ था, इसलिए पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में उनकी जयंती ‘पोन्चीशे बोइशाख’ के रूप में मनाई जाती है।
क्यों कहलाए ‘गुरुदेव’?
रवींद्रनाथ टैगोर को महात्मा गांधी ने ‘गुरुदेव’ की उपाधि दी थी। वहीं टैगोर ने गांधी जी को ‘महात्मा’ कहकर संबोधित किया था। टैगोर को ‘विश्वकवि’ और ‘कविगुरु’ के नाम से भी जाना जाता है।
साहित्य जगत में अमूल्य योगदान
रवींद्रनाथ टैगोर ने बहुत छोटी उम्र से ही लिखना शुरू कर दिया था। बताया जाता है कि उन्होंने मात्र 8 साल की उम्र में अपनी पहली कविता लिखी थी। 16 वर्ष की आयु में उनका पहला कविता संग्रह प्रकाशित हुआ। उन्होंने कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक, गीत और निबंध सहित कई विधाओं में लेखन किया। उनकी प्रसिद्ध कृति ‘गीतांजलि’ के लिए उन्हें वर्ष 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला था। वह साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार पाने वाले एशिया के पहले व्यक्ति बने।
राष्ट्रगान से भी जुड़ा है टैगोर का नाम
रवींद्रनाथ टैगोर ने भारत का राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ लिखा। इतना ही नहीं, बांग्लादेश का राष्ट्रगान ‘आमार शोनार बांग्ला’ भी उन्हीं की रचना है। उनके गीतों और संगीत को ‘रवींद्र संगीत’ के नाम से जाना जाता है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी निभाई अहम भूमिका
टैगोर ने शिक्षा को नई दिशा देने के लिए शांतिनिकेतन में ‘विश्व भारती विश्वविद्यालय’ की स्थापना की थी। उनका मानना था कि शिक्षा प्रकृति और रचनात्मकता के साथ जुड़ी होनी चाहिए। आज भी विश्व भारती विश्वविद्यालय देश-विदेश में प्रसिद्ध है।
कैसे मनाई जाती है रवींद्र जयंती?
रवींद्र जयंती के अवसर पर बंगाल समेत कई राज्यों में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। छात्र-छात्राएं रवींद्र संगीत गाते हैं, उनकी कविताओं का पाठ करते हैं और नाटक प्रस्तुत करते हैं। लोग पारंपरिक बंगाली परिधान पहनकर इस दिन को खास तरीके से मनाते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने भी दी श्रद्धांजलि
आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रवींद्रनाथ टैगोर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें “सभ्यता की शाश्वत आवाज” बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि टैगोर के विचार और रचनाएं आज भी देश को प्रेरित करती हैं। रवींद्रनाथ टैगोर सिर्फ कवि नहीं, बल्कि एक दार्शनिक, समाज सुधारक, संगीतकार और महान शिक्षाविद भी थे। उनकी रचनाएं आज भी लोगों को मानवता, शांति और रचनात्मकता का संदेश देती हैं। यही वजह है कि उनकी जयंती सिर्फ बंगाल ही नहीं, बल्कि पूरे देश और दुनिया में बड़े सम्मान के साथ मनाई जाती है।