कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर अपना हमला और तेज कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में 20 जुलाई को विरोध मार्च के दौरान छात्रों के साथ कथित तौर पर बल प्रयोग किया गया, लेकिन इस घटना पर सरकार की ओर से अब तक अपेक्षित जवाब नहीं मिला है। प्रयागराज में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के एक दिन बाद राहुल गांधी ने सामाजिक माध्यम ‘एक्स’ पर अपने संदेश में छात्रों के सवालों को देश के भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि वह पूरी ताकत के साथ उनके साथ खड़े हैं। उनका बयान ऐसे समय आया है जब प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार और शिक्षा व्यवस्था को लेकर युवाओं में असंतोष की चर्चा लगातार बढ़ रही है।
‘छात्रों को उनकी मेहनत का फल नहीं मिला’
राहुल गांधी ने प्रयागराज में छात्रों से हुई बातचीत का हवाला देते हुए कहा कि युवाओं की व्यक्तिगत असफलता के पीछे कई बार व्यवस्था की विफलता छिपी होती है। उन्होंने एक छात्र की बात साझा करते हुए कहा कि वर्षों तक परीक्षा की तैयारी करने, परिवार की जमीन बेचने और माता-पिता पर कर्ज का बोझ बढ़ने के बाद भी जब परिणाम हाथ नहीं आता तो इसे केवल छात्र की हार नहीं कहा जा सकता। उनके मुताबिक यह उस व्यवस्था की विफलता है जो युवाओं की मेहनत का उचित परिणाम सुनिश्चित नहीं कर पा रही है। राहुल गांधी ने शिक्षा और रोजगार के बीच बढ़ती दूरी को रेखांकित करते हुए कहा कि युवा लंबे समय तक तैयारी और आर्थिक निवेश के बाद भी अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे हैं।
मोदी और शाह पर सीधे निशाना, मांगा जवाब
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सीधे निशाना साधते हुए कहा कि कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि घटना को 13 दिन बीत जाने के बावजूद गृह मंत्री की ओर से इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि छात्रों पर कथित रूप से लाठी और पैलेट का इस्तेमाल किए जाने के बावजूद सरकार की ओर से इस पर पर्याप्त संवेदनशीलता नहीं दिखाई गई। उन्होंने कहा कि विपक्ष छात्रों के इस मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगा और सरकार को किसी न किसी स्तर पर जवाब देना होगा। हालांकि पुलिस कार्रवाई और उससे जुड़े आरोपों के प्रत्येक तथ्य की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित पक्षों का पक्ष भी इस पूरे विवाद को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
शिक्षा और रोजगार के बीच बढ़ती खाई बना बड़ा सवाल
राहुल गांधी ने अपने वक्तव्य को केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था और रोजगार के अवसरों पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में युवा महंगी शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर समय तथा धन खर्च कर रहे हैं, लेकिन शिक्षा पूरी करने के बाद भी रोजगार की निश्चितता नहीं है। उच्च शिक्षा के बढ़ते खर्च, प्रतियोगी परीक्षाओं में कड़ी प्रतिस्पर्धा और सीमित रोजगार अवसरों के बीच युवाओं पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ने की बात लंबे समय से सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा रही है। राहुल गांधी इसी व्यापक समस्या को युवाओं के ‘चक्रव्यूह’ के रूपक के जरिए सामने रख रहे हैं।
‘शैक्षणिक प्रमाणपत्र नौकरी की गारंटी नहीं’ का मुद्दा
प्रयागराज के कार्यक्रम में राहुल गांधी ने यह भी कहा कि देश के युवा ऐसे शैक्षणिक प्रमाणपत्रों पर बड़ी रकम खर्च कर रहे हैं, जिनसे रोजगार की गारंटी नहीं मिलती। उन्होंने शिक्षा और रोजगार के बीच संबंध को लेकर मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल डिग्री हासिल कर लेना युवाओं के लिए पर्याप्त नहीं रह गया है। उनके अनुसार शिक्षा व्यवस्था को रोजगार बाजार की जरूरतों, कौशल विकास और वास्तविक आर्थिक अवसरों से जोड़ना जरूरी है। इस बहस में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, व्यावसायिक प्रशिक्षण, निजी संस्थानों की फीस और रोजगार योग्य कौशल जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं, जिनका सीधा संबंध लाखों युवाओं के भविष्य से है।
‘चक्रव्यूह’ में फंसे युवाओं की तस्वीर पेश की
राहुल गांधी ने शनिवार को युवाओं की स्थिति को ‘चक्रव्यूह’ के रूपक से समझाते हुए कहा था कि युवा शिक्षा के लिए भारी निवेश कर रहे हैं, लेकिन उसके बाद भी रोजगार सुनिश्चित नहीं है। इस बयान के जरिए उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार बाजार के बीच मौजूद असंतुलन को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाने की कोशिश की। उनका तर्क है कि जब परिवार वर्षों तक किसी युवा की शिक्षा और तैयारी का खर्च उठाता है और उसके बाद भी नौकरी की संभावना अनिश्चित रहती है तो इसका प्रभाव केवल उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है। यही वजह है कि युवाओं से जुड़े ये सवाल अब केवल शिक्षा नीति का विषय नहीं बल्कि व्यापक सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा बन चुके हैं।
छात्र आंदोलन के बीच बढ़ सकता है राजनीतिक टकराव
छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और शिक्षा तथा रोजगार से जुड़े सवालों ने केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव को और तीखा कर दिया है। कांग्रेस इसे युवाओं की आवाज और जवाबदेही के प्रश्न के रूप में प्रस्तुत कर रही है, जबकि सरकार और प्रशासन की ओर से घटना के तथ्यों, कानून-व्यवस्था और कार्रवाई के संदर्भ को सामने रखना महत्वपूर्ण होगा। आने वाले दिनों में यदि छात्र संगठनों की ओर से विरोध प्रदर्शन जारी रहते हैं तो यह मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक राजनीतिक विमर्श को प्रभावित कर सकता है। राहुल गांधी का ताजा बयान संकेत देता है कि कांग्रेस इस विषय को केवल एक घटना के रूप में नहीं बल्कि शिक्षा, रोजगार और युवा अधिकारों से जुड़े व्यापक प्रश्न के रूप में आगे ले जाने की तैयारी में है।