नई दिल्ली. रेलवे बोर्ड ने रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला में निर्मित अल्स्टॉम प्रणोदन प्रणाली से लैस 16 कार वाली वंदे भारत चेयर कार ट्रेनसेट को भारतीय रेलवे नेटवर्क पर 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलाने की मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी निर्धारित सुरक्षा और परिचालन शर्तों के अधीन है। बोर्ड के पत्र के अनुसार ट्रेनसेट को भारतीय रेलवे परमानेंट वे मैनुअल 2024 के तहत निर्धारित ट्रैक मानकों पर ही संचालित किया जाएगा। इसमें 160 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति के लिए ट्रैक ज्यामिति संबंधी आवश्यकताएं शामिल हैं।
तकनीकी मंजूरी और शर्तें
यह मंजूरी रिसर्च डिजाइन्स एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन की सिफारिशों और तकनीकी क्लियरेंस के बाद दी गई है। ट्रेन को उन ट्रैकों पर ही चलाया जाएगा जो निर्धारित मानकों को पूरा करते हों। सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करना अनिवार्य होगा। परिचालन संबंधी शर्तों का अनुपालन सुनिश्चित करने के बाद ही नियमित सेवा शुरू की जाएगी। उच्च गति पर सुरक्षित संचालन के लिए ट्रैक और सिग्नलिंग सिस्टम की तैयारी जरूरी है। रेलवे इन सभी पहलुओं पर ध्यान दे रहा है।
पंजाब में विनिर्माण की उपलब्धि
यह ट्रेनसेट पंजाब के कपूरथला स्थित रेल कोच फैक्ट्री में तैयार की गई है। अल्स्टॉम की प्रणोदन प्रणाली से लैस होने के कारण यह आधुनिक तकनीक से युक्त है। स्वदेशी विनिर्माण क्षमता को बढ़ावा देने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है। कपूरथला फैक्ट्री ने उच्च गुणवत्ता वाली वंदे भारत ट्रेनें तैयार करके अपनी क्षमता साबित की है। इससे पंजाब के औद्योगिक विकास और रोजगार को भी बल मिलेगा। मेड इन इंडिया अभियान को मजबूत करने वाला यह उदाहरण है।
160 किमी प्रति घंटे की स्पीड का महत्व
160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने वाली वंदे भारत ट्रेन यात्रा समय को काफी कम कर देगी। यात्री सुविधाओं में सुधार के साथ तेज और आरामदायक सफर उपलब्ध होगा। चेयर कार ट्रेनसेट होने के कारण यह दिन की यात्रा के लिए उपयुक्त है। उच्च गति क्षमता से रेलवे नेटवर्क की दक्षता बढ़ेगी। निर्धारित शर्तों के पालन से सुरक्षा सुनिश्चित रहेगी। यात्रियों को बेहतर अनुभव देने की दिशा में यह प्रगति है।
सुरक्षा और परिचालन पर जोर
रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि मंजूरी सुरक्षा और परिचालन शर्तों के अधीन है। ट्रैक की स्थिति, सिग्नलिंग और रखरखाव मानकों का पालन अनिवार्य होगा। नियमित निरीक्षण और परीक्षण के बाद ही पूर्ण संचालन शुरू होगा। उच्च गति पर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। रेलवे सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। सभी तकनीकी मापदंडों की जांच के बाद ही ट्रेन को रूट पर उतारा जाएगा।
स्वदेशी क्षमता और भविष्य की दिशा
कपूरथला में बनी इस ट्रेन की मंजूरी स्वदेशी विनिर्माण क्षमता का प्रतीक है। रेलवे लगातार वंदे भारत ट्रेनों के उत्पादन और उच्च गति क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है। भविष्य में और अधिक रूट्स पर ऐसी ट्रेनें चलाने की योजना है। आधुनिक तकनीक और सुरक्षा मानकों के संयोजन से भारतीय रेलवे विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन रहा है। यात्री सुविधाओं में सुधार के साथ नेटवर्क का आधुनिकीकरण जारी रहेगा।