नई दिल्ली. राजनाथ सिंह 21 से 23 अप्रैल तक जर्मनी के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। यह यात्रा इसलिए भी विशेष मानी जा रही है क्योंकि पिछले सात वर्षों में यह किसी भारतीय रक्षा मंत्री का पहला जर्मनी दौरा है। इससे पहले वर्ष 2019 में तत्कालीन रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने जर्मनी का दौरा किया था।
रणनीतिक रक्षा साझेदारी पर जोर
इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत और जर्मनी के बीच रणनीतिक रक्षा सहयोग को और सुदृढ़ बनाना है। दोनों देशों के बीच पहले से ही मजबूत कूटनीतिक संबंध रहे हैं, जिन्हें अब रक्षा और तकनीकी क्षेत्रों में विस्तार देने की कोशिश की जा रही है।
उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता
दौरे के दौरान रक्षा मंत्री अपने जर्मन समकक्ष बोरिस पिस्टोरियस और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ विस्तृत चर्चा करेंगे। इन वार्ताओं में क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा मुद्दों के साथ-साथ आपसी सहयोग को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
उभरती तकनीकों पर रहेगा फोकस
रक्षा मंत्रालय के अनुसार इस यात्रा में साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन तकनीक और अन्य उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विचार किया जाएगा। आधुनिक युद्ध और सुरक्षा प्रणाली में इन तकनीकों की बढ़ती भूमिका को देखते हुए दोनों देश इन क्षेत्रों में साझा अवसर तलाश रहे हैं।
रक्षा उद्योग में सहयोग और ‘मेक इन इंडिया’
दौरे के दौरान रक्षा उद्योग से जुड़े प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ भी बातचीत होने की संभावना है। भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत संयुक्त विकास और सह-उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा, जिससे देश की रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूत किया जा सके।
संभावित समझौते और साझेदारी
सूत्रों के अनुसार इस यात्रा के दौरान रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप और संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों के प्रशिक्षण से जुड़े समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। यह सहयोग दोनों देशों के बीच विश्वास और सामरिक तालमेल को और गहरा करेगा।
बदलते वैश्विक परिदृश्य में अहम पहल
वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में रक्षा सहयोग का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में यह दौरा भारत और जर्मनी के बीच संबंधों को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है, जिससे दोनों देश भविष्य की चुनौतियों का मिलकर सामना कर सकेंगे।