रांची: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। रविवार को छात्रों और राज्य सरकार के बीच तीसरे दौर की बातचीत हुई। करीब पांच घंटे चली इस बैठक के बाद छात्र प्रतिनिधियों ने दावा किया कि उनकी 50 प्रतिशत से अधिक मांगों पर सरकार के साथ सहमति बन गई है, लेकिन कुछ अहम मुद्दे अब भी लंबित हैं। यही वजह है कि छात्रों ने सोमवार, 10 अगस्त को विधानसभा घेराव का कार्यक्रम जारी रखने का फैसला किया है।
छात्र प्रतिनिधिमंडल के मुताबिक, 14वीं JPSC परीक्षा और JPSC बैकलॉग 2023 व 2025 से संबंधित परीक्षाओं को रद्द करने की मांग पर सरकार की सहमति बनी है। इसके अलावा JPSC की परीक्षा प्रक्रिया में सुधार यानी रिफॉर्म को लेकर भी बातचीत सकारात्मक रही। हालांकि, CGL परीक्षा और TDPL एजेंसी द्वारा आयोजित परीक्षाओं को रद्द करने जैसे मुद्दों पर अभी सहमति नहीं बन सकी है।
पांच घंटे चली छात्रों और सरकार की बैठक
रविवार को हुई बैठक में छात्र प्रतिनिधिमंडल और सरकार के बीच विभिन्न मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई। यह बातचीत तीसरे दौर की थी और करीब पांच घंटे तक चली।बैठक के बाद छात्र प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि कई मांगों पर सरकार ने सकारात्मक रुख अपनाया है। छात्रों के मुताबिक, 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करने और बैकलॉग से जुड़ी 2023 तथा 2025 की परीक्षाओं के संबंध में भी सरकार सहमत हुई है।JPSC की मौजूदा परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर भी बातचीत में सहमति बनने की बात छात्रों ने कही। हालांकि, छात्रों का कहना है कि जब तक सभी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं हो जाता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।
सोमवार को विधानसभा का घेराव
बैठक के बाद छात्र नेता कुणाल ने स्पष्ट किया कि 10 अगस्त को विधानसभा घेराव का कार्यक्रम जारी रहेगा।उन्होंने कहा कि विधानसभा का घेराव शांतिपूर्ण तरीके से किया जाएगा। छात्रों की सबसे बड़ी मांग परीक्षा से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच CBI से कराने की है। छात्र नेताओं का कहना है कि जांच एजेंसी के मुद्दे पर वे किसी तरह का समझौता करने के लिए तैयार नहीं हैं।ऐसे में सरकार और छात्रों के बीच बातचीत के बावजूद आंदोलन पूरी तरह खत्म होता नजर नहीं आ रहा है।
CBI जांच की मांग पर अड़े छात्र
छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि परीक्षा में कथित धांधली और अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच के लिए CBI जैसी केंद्रीय एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए।छात्र नेता कुणाल ने कहा कि उनकी मांग केवल जांच कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे ऐसी एजेंसी से जांच चाहते हैं जिस पर छात्रों को पूरा भरोसा हो। इसी मुद्दे को लेकर छात्र आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं।सरकार की ओर से इस मामले में अलग जांच व्यवस्था का प्रस्ताव रखा गया है, लेकिन CBI जांच की मांग पर अभी सहमति नहीं बन सकी है।
सरकार ने ED जांच की बात कही
सरकार की ओर से बैठक में कहा गया कि परीक्षा से जुड़ी धांधली की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) से कराई जाएगी। इसके अलावा मामलों के जल्द निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने की बात भी सरकार ने कही है।सरकार का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार विशेषज्ञों की राय के आधार पर किया जाएगा। इससे भविष्य में भर्ती परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की कोशिश की जाएगी।हालांकि, छात्रों की ओर से CBI जांच की मांग पर जोर दिए जाने के कारण यह मुद्दा अभी भी विवाद का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
CGL परीक्षा पर क्यों अटका मामला?
बैठक में CGL परीक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। छात्रों की ओर से CGL परीक्षा को लेकर भी कार्रवाई और जांच की मांग की गई है।सरकार ने कहा कि CGL परीक्षा केंद्र सरकार की ओर से आयोजित की गई थी। ऐसे में राज्य सरकार अपने स्तर पर इस परीक्षा को रद्द नहीं कर सकती।सरकार ने विकल्प के तौर पर CGL मामले की जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में कराने का प्रस्ताव रखा। हालांकि, छात्रों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।यही वजह है कि CGL को लेकर दोनों पक्षों के बीच अभी अंतिम सहमति नहीं बन पाई है।
TDPL परीक्षा को लेकर भी मतभेद
बैठक में TDPL एजेंसी द्वारा आयोजित परीक्षाओं का मुद्दा भी उठा। छात्र प्रतिनिधिमंडल की मांग है कि TDPL के माध्यम से आयोजित परीक्षाओं को रद्द किया जाए।हालांकि, इस मांग पर भी सरकार और छात्रों के बीच सहमति नहीं बन सकी। यह मामला भी फिलहाल लंबित है।छात्रों का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े सभी विवादों का स्पष्ट समाधान नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
JPSC रिफॉर्म पर बनी सहमति
बैठक से निकलकर सामने आई सबसे महत्वपूर्ण बातों में JPSC की परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर बनी सहमति शामिल है।सरकार ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में बदलाव विशेषज्ञों की राय के आधार पर किया जाएगा। इसका उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और भविष्य में विवादों की संभावनाओं को कम करना है।छात्रों की ओर से भी परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग लंबे समय से की जा रही है। ऐसे में इस मुद्दे पर बनी सहमति को बातचीत की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
50 फीसदी से ज्यादा मांगों पर बनी बात
छात्र डेलिगेशन ने दावा किया कि रविवार की बैठक में उनकी 50 प्रतिशत से अधिक मांगों पर सहमति बन गई है। हालांकि, छात्रों के लिए कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें वे सबसे महत्वपूर्ण मान रहे हैं और उन पर सहमति नहीं बनने के कारण आंदोलन खत्म नहीं किया गया है।छात्रों का कहना है कि 14वीं JPSC और बैकलॉग परीक्षाओं से जुड़े मामलों में सरकार का रुख सकारात्मक रहा है, लेकिन CBI जांच और TDPL परीक्षा जैसे विषयों पर अभी स्पष्ट निर्णय जरूरी है।
विधानसभा घेराव को लेकर प्रशासन की चुनौती
छात्रों द्वारा सोमवार को विधानसभा घेराव का ऐलान किए जाने के बाद प्रशासन के सामने भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती होगी। छात्र नेताओं ने आंदोलन को शांतिपूर्ण रखने की बात कही है।अब सबकी नजर सोमवार को होने वाले प्रदर्शन पर रहेगी। एक तरफ सरकार छात्रों की कई मांगों पर सहमति बनने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर छात्र संगठन अभी भी अपनी प्रमुख मांगों को लेकर पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।
बातचीत का अगला दौर होगा अहम
तीसरे दौर की बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों पर प्रगति जरूर हुई है, लेकिन विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। खासतौर पर CBI जांच, CGL परीक्षा और TDPL से जुड़ी मांगें अभी भी महत्वपूर्ण बनी हुई हैं।अब विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों का रुख और सरकार की ओर से आगे की कार्रवाई इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी। यदि शेष मुद्दों पर भी सहमति बन जाती है, तो लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन को खत्म करने का रास्ता खुल सकता है। फिलहाल छात्र सोमवार के प्रदर्शन की तैयारी में हैं और सरकार के अगले कदम पर भी सबकी नजर बनी हुई है।