हमीरपुर: संत शिरोमणि रविदास जी महाराज की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित करीब 750 किलोमीटर लंबी कलश वंदन यात्रा का रविवार को नादौन विधानसभा क्षेत्र के ढगोह में समापन हुआ। समापन समारोह में पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं हमीरपुर सांसद अनुराग सिंह ठाकुर सहित भाजपा के कई वरिष्ठ नेता, संत समाज और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।समारोह के दौरान संत रविदास जी के सामाजिक संदेश, समानता और मानवता के सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।
750 किलोमीटर की यात्रा के जरिए दिया सामाजिक समरसता का संदेश
कलश वंदन यात्रा ने करीब 750 किलोमीटर की दूरी तय की। यात्रा के दौरान संत रविदास जी के विचारों और उनके सामाजिक संदेश को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।समापन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि संत रविदास जी ने अपने जीवन और विचारों के माध्यम से समाज में समानता, भाईचारे और मानवता की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया। उनकी शिक्षाएं किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति को साथ लेकर चलने की प्रेरणा देती हैं।उन्होंने कहा कि यात्रा का उद्देश्य केवल एक धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं था। इसके जरिए सामाजिक समरसता, आपसी सद्भाव और समाजहित की भावना को मजबूत करने का प्रयास किया गया।
सात महीने तक चलेगा संत रविदास जयंती से जुड़ा अभियान
पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि संत रविदास जी की 650वीं जयंती का आयोजन केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहेगा। उनके जीवन और विचारों को देश के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए आने वाले सात महीनों तक देशव्यापी अभियान चलाया जाएगा।उन्होंने कहा कि संत रविदास जी का संदेश आज के दौर में भी उतना ही प्रासंगिक है। समाज में समानता और भाईचारे को मजबूत करने के लिए उनकी शिक्षाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।उन्होंने कहा कि अभियान के माध्यम से देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को संत रविदास जी के विचारों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि संत रविदास जी ने समाज को जाति, पंथ और ऊंच-नीच के भेदभाव से बाहर निकलने का रास्ता दिखाया। उनका संदेश सामाजिक समानता और मानवता पर आधारित था।उन्होंने कहा कि संत रविदास की शिक्षाएं समाज के सभी वर्गों को एक साथ लेकर चलने की प्रेरणा देती हैं। उनके विचारों को आगे बढ़ाने का सबसे बेहतर तरीका यही है कि समाज में भेदभाव की जगह आपसी सम्मान और सहयोग की भावना को मजबूत किया जाए।
लाल सिंह आर्य ने बताया अभियान का अगला रोडमैप
भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य ने भी समापन समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सामाजिक समरसता को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।उन्होंने बताया कि काशी से शुरू हुए समरसता संकल्प अभियान के तहत देश के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस अभियान को कई चरणों में आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि संत रविदास जी के विचारों को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाया जा सके।
पांच चरणों में होंगे देशभर में कार्यक्रम
लाल सिंह आर्य के मुताबिक, समरसता संकल्प अभियान को पांच चरणों में आयोजित किया जाएगा। इसके तहत राष्ट्रीय स्तर से लेकर प्रदेश, जिला और मंडल स्तर तक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।उन्होंने कहा कि अभियान का विस्तार केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रहेगा। पंजाब, जालंधर, हिमाचल प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में भी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।इस दौरान संत रविदास जी के जीवन, संघर्ष, सामाजिक योगदान और उनकी शिक्षाओं पर चर्चा के साथ लोगों को सामाजिक समरसता का संदेश दिया जाएगा।
छात्र संपर्क के जरिए युवाओं को जोड़ा जाएगा
अभियान के अंतिम चरण में छात्र संपर्क कार्यक्रम पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य युवा पीढ़ी को संत रविदास जी के जीवन और विचारों से परिचित कराना है।आयोजकों का मानना है कि सामाजिक बदलाव के लिए युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसलिए संत रविदास के समानता और मानवता के संदेश को विद्यार्थियों तक पहुंचाकर उन्हें सामाजिक समरसता की भावना से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
संत रविदास के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर
समापन समारोह में वक्ताओं ने कहा कि संत रविदास जी का जीवन समाज में समानता और मानवता की स्थापना के लिए प्रेरणा देता है। उनकी शिक्षाओं को केवल पुस्तकों या आयोजनों तक सीमित रखने के बजाय आम लोगों के बीच ले जाने की जरूरत है।750 किलोमीटर लंबी कलश वंदन यात्रा के समापन के साथ अब संत रविदास जी की 650वीं जयंती के अवसर पर प्रस्तावित व्यापक अभियान को आगे बढ़ाने की तैयारी है। आयोजकों का लक्ष्य देश के विभिन्न हिस्सों में कार्यक्रमों के माध्यम से उनके विचारों और सामाजिक समरसता के संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है।