कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद भी सियासी पारा लगातार चढ़ा हुआ है। अब सीधे लोकतंत्र के मंदिर यानी विधानसभा के भीतर विधायकों के हस्ताक्षर जालसाजी (Signature Forgery) का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने राज्य सचिवालय 'नबन्ना' में पत्रकारों से बातचीत के दौरान इस पूरे मामले का पर्दाफाश किया। मुख्यमंत्री ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) को आड़े हाथों लेते हुए बेहद कड़े शब्दों में कहा, "तृणमूल कांग्रेस की चोरी और हेराफेरी करने की पुरानी आदत अभी तक नहीं छूटी है।"
क्या है यह पूरा हस्ताक्षर विवाद?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि गत 9 मई को टीएमसी के अखिल भारतीय महासचिव ने विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) रथेंद्र बसु (Rathindra Basu) को एक पत्र भेजा था। उस पत्र में दावा किया गया था कि विधानसभा में शोभनदेव चट्टोपाध्याय विपक्ष के नेता (Leader of Opposition) और नयना बनर्जी डिप्टी लीडर होंगी।
इस पर तंज कसते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "उन्हें तो यह भी नहीं पता कि विधानसभा के नियमों में 'डिप्टी लीडर' जैसा कोई पद ही नहीं होता। नियम के मुताबिक, उन्हें विधायक दल की बैठक का प्रस्ताव (रेज़ॉल्यूशन कॉपी) जमा करने को कहा गया था, जिसे टीएमसी ने 27 मई को विधानसभा सचिवालय में जमा किया।"
ब्लॉक लेटर्स में दस्तखत देख खुला राज, अपने ही विधायकों ने खोली पोल
मुख्यमंत्री ने खुलासा किया कि 27 मई को टीएमसी द्वारा जमा की गई रेज़ॉल्यूशन कॉपी में कई विधायकों के नाम 'ब्लॉक लेटर्स' (अंग्रेजी के बड़े अक्षरों) में लिखे हुए थे, जिससे शक पैदा हुआ। इसके बाद टीएमसी के ही दो विधायकों—ऋतब्रत बंदोपाध्याय और संदीपन साहा ने खुद स्पीकर के पास जाकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। दोनों विधायकों का दावा है कि विपक्ष के नेता के चयन के लिए दिखाई जा रही 6 मई की बैठक की यह रेज़ॉल्यूशन कॉपी पूरी तरह फर्जी और डुप्लीकेट है। इसमें कम से कम 14 विधायकों के जाली हस्ताक्षर किए गए हैं।
इसी पर हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा, "मीडिया को यह राजनीतिक प्रतिशोध (Political Vendetta) लग सकता है, लेकिन सच तो यह है कि यह पार्टी (TMC) अब पूरी तरह खत्म हो चुकी है।"
CID जांच शुरू, विधायकों ने कहा- 'हम बैठक में थे ही नहीं'
शिकायत मिलने के बाद शुरुआती तौर पर कोलकाता के हेयर स्ट्रीट थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज की गई थी। लेकिन मामला बेहद गंभीर होने और इसमें कई विधायकों के नाम शामिल होने के कारण, मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद इसकी जांच सीआईडी (CID) को सौंप दी गई है।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बताया कि सीआईडी ने अब तक 13 विधायकों के हस्ताक्षरों का मिलान (Verify) किया है। इनमें से बहारुल इस्लाम समेत तीन टीएमसी विधायकों ने साफ-साफ लिखित में दे दिया है कि इस कॉपी पर मौजूद दस्तखत उनके नहीं हैं। विधायक बहारुल इस्लाम ने सीआईडी को बताया कि जिस दिन यह कथित बैठक बुलाई गई थी, उस दिन वे कोलकाता में नहीं बल्कि भांगड़ स्थित अपने घर पर थे।
दोषियों के खिलाफ होगी बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि सभी हस्ताक्षरों की हैंडराइटिंग एक्सपर्ट्स से फॉरेंसिक जांच (Forensic Test) कराई जा रही है। उन्होंने साफ कहा, "जो लोग खुद कानून बनाने वाले (विधायक) हैं, अगर वही विधानसभा के दस्तावेजों में जालसाजी जैसा संगीन अपराध करेंगे, तो उनके खिलाफ कानून के तहत बेहद कठोर और सख्त कदम उठाए जाएंगे।" राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस 'हस्ताक्षर कांड' के जरिए सुवेंदु अधिकारी सरकार ने टीएमसी को कानूनी और राजनीतिक रूप से पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया है।