चाय बोर्ड के डिप्टी चेयरमैन सी. मुरुगन ने कहा कि देश में निम्न गुणवत्ता वाली आयातित चाय के प्रवेश पर रोक के लिए 100 प्रतिशत परीक्षण अनिवार्य किया जा रहा है। पिछले कुछ समय से उद्योग जगत शिकायत कर रहा था कि नेपाल और वियतनाम जैसे देशों से सस्ती और घटिया क्वालिटी की चाय आ रही है, जिससे भारतीय चाय की साख और बाजार हिस्सेदारी दोनों प्रभावित हो रही हैं।
परीक्षण प्रक्रिया को मिल रहा औपचारिक ढांचा
मुरुगन के अनुसार, इस गुणवत्ता परीक्षण व्यवस्था का पूरा ढांचा तैयार किया जा रहा है, जिसमें लगभग 15–20 दिन लगेंगे। इसके बाद कानूनी राय और वाणिज्य मंत्रालय की मंजूरी ली जाएगी। यह कदम न केवल नियंत्रण को मजबूत करेगा, बल्कि पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उद्योग के लिए ‘फैसिलिटेटर’ बनेगा चाय बोर्ड
चाय बोर्ड ने स्पष्ट किया कि वह नीलामी प्रणाली में सीधे हस्तक्षेप नहीं करेगा, बल्कि इसे और बेहतर तथा सुगम बनाने में सहयोग करेगा। साथ ही भारतीय चाय के ब्रांड वैल्यू, प्रचार और वैश्विक मार्केटिंग को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय चाय की प्रतिष्ठा और मजबूत हो।
छोटे उत्पादकों को भी मिलेगा बड़ा लाभ
चाय विकास और प्रचार योजना के तहत अगले पाँच वर्षों के लिए 1,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना का उद्देश्य छोटे चाय उत्पादकों को तकनीकी, आर्थिक और विपणन सहायता उपलब्ध कराना है। इससे उत्पादन गुणवत्ता सुधारने और टिकाऊ विकास सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
दार्जीलिंग उद्योग के लिए बड़ी राहत की उम्मीद
पश्चिम बंगाल सरकार के श्रम सचिव अवनींद्र सिंह ने कहा कि सस्ती और निम्न गुणवत्ता वाली नेपाली चाय दार्जीलिंग चाय उद्योग को नुकसान पहुँचा रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि बंद पड़ी चाय बागानों को पुनर्जीवित करने के लिए उद्योगपति आगे आएँ और कामगारों को इक्विटी देकर उनकी भागीदारी बढ़ाएँ। इससे श्रमिकों में स्वामित्व की भावना पैदा होगी और उद्योग को नई ऊर्जा मिलेगी।
गुणवत्ता होगी भारतीय चाय की असली पहचान
यह निर्णय न केवल आयातित चाय पर नियंत्रण सुनिश्चित करेगा, बल्कि भारतीय चाय की वैश्विक पहचान और मूल्य को भी संरक्षित करेगा। आने वाले समय में इसका असर उद्योग, निर्यात और लाखों चाय श्रमिकों के जीवन पर सकारात्मक पड़ने की उम्मीद है।
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