नई दिल्ली. भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (Telecom Regulatory Authority of India) ने सार्वजनिक वाई फाई नेटवर्क के विस्तार को लेकर महत्वपूर्ण चिंता व्यक्त की है। जारी परामर्श पत्र में कहा गया है कि देश में मुफ्त इंटरनेट सेवा की बढ़ती अपेक्षा इस क्षेत्र के विकास में एक बड़ी बाधा बन रही है। यह न केवल तकनीकी बल्कि मनोवैज्ञानिक और आर्थिक चुनौती भी पैदा कर रही है।
मुफ्त सेवा की मानसिकता बनी चुनौती
परामर्श पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि भारतीय उपभोक्ताओं की सोच तेजी से इस दिशा में विकसित हुई है कि इंटरनेट सेवा लगभग बिना लागत की होनी चाहिए। इसी कारण जब सार्वजनिक वाई फाई हॉटस्पॉट के लिए मामूली शुल्क भी लिया जाता है तो लोग उसे स्वीकार करने में हिचकिचाते हैं। यह प्रवृत्ति सेवा प्रदाताओं के लिए गंभीर समस्या बनती जा रही है क्योंकि इससे उनकी आय प्रभावित होती है।
सस्ते मोबाइल डेटा का प्रभाव
देश में 4जी और 5जी मोबाइल डेटा की सस्ती दरों ने भी इस मानसिकता को मजबूत किया है। उपभोक्ताओं को मोबाइल इंटरनेट बेहद कम कीमत पर उपलब्ध हो रहा है जिससे वे सार्वजनिक वाई फाई सेवाओं की आवश्यकता कम महसूस करते हैं। यह स्थिति सार्वजनिक नेटवर्क के विस्तार और उसके उपयोग दोनों के लिए चुनौती खड़ी कर रही है।
व्यावसायिक मॉडल पर पड़ रहा असर
ट्राई के अनुसार सार्वजनिक वाई फाई सेवाएं आमतौर पर सशुल्क बिजनेस मॉडल पर आधारित होती हैं। जब उपयोगकर्ता भुगतान करने के लिए तैयार नहीं होते तो यह मॉडल टिकाऊ नहीं रह पाता। परिणामस्वरूप नए हॉटस्पॉट स्थापित करने में निवेशकों की रुचि कम हो जाती है और नेटवर्क विस्तार की गति धीमी पड़ जाती है।
डिजिटल कनेक्टिविटी पर असर
सार्वजनिक वाई फाई नेटवर्क का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों तक इंटरनेट पहुंचाना है विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां मोबाइल डेटा की पहुंच सीमित है। लेकिन वर्तमान स्थिति में यह लक्ष्य प्रभावित हो रहा है। यदि उपभोक्ताओं की मानसिकता में बदलाव नहीं आता तो डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार पर भी असर पड़ सकता है।
सुझाव और आगे की प्रक्रिया
नियामक ने इस विषय पर सभी संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं और इसके लिए 25 मई तक टिप्पणी तथा आठ जून तक जवाबी टिप्पणी की समय सीमा तय की है। उम्मीद की जा रही है कि प्राप्त सुझावों के आधार पर भविष्य में ऐसी नीतियां बनाई जाएंगी जो सार्वजनिक वाई फाई नेटवर्क को मजबूत और टिकाऊ बना सकें।