नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में देश के बुनियादी ढांचे, सेमीकंडक्टर उद्योग, मोबाइल विनिर्माण, उर्वरक उत्पादन और रेलवे नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (Semicon 2.0) के दूसरे चरण के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये, मोबाइल निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 62,500 करोड़ रुपये तथा वाराणसी में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स सहित कई योजनाओं को हरी झंडी दी।
वाराणसी की दो बड़ी परियोजनाओं को मिली मंजूरी
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि वाराणसी में ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए दो महत्वपूर्ण एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।कैबिनेट ने एनएच-19 और वाराणसी रिंग रोड के बीच करीब 14,447.64 करोड़ रुपये की लागत से छह लेन के नए एलिवेटेड कॉरिडोर को स्वीकृति दी है। इसके अलावा एनएच-31 को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ने वाले 43.218 किलोमीटर लंबे छह और चार लेन एलिवेटेड कॉरिडोर को भी मंजूरी दी गई है, जिसकी अनुमानित लागत 10,998.32 करोड़ रुपये होगी।
काशी में ट्रैफिक व्यवस्था होगी बेहतर
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि काशी में हर वर्ष लगभग 15 करोड़ पर्यटक आते हैं। बढ़ती यातायात आवश्यकता को देखते हुए इन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।उन्होंने बताया कि वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर और गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण से शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या काफी हद तक समाप्त होगी और लोगों की आवाजाही पहले से अधिक आसान हो जाएगी।
मोबाइल निर्माण के लिए 62,500 करोड़ रुपये की मंजूरी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मोबाइल फोन निर्माण को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के दूसरे चरण को भी मंजूरी दी है।इस योजना के तहत 62,500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य देश में मोबाइल निर्माण क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ एक मजबूत भारतीय मोबाइल ब्रांड विकसित करना है।केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहेगी। इससे लगभग 15 लाख करोड़ रुपये का निर्यात और करीब 60 हजार प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है।
सेमीकॉन 2.0 को मिली मंजूरी
कैबिनेट ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 को भी मंजूरी दे दी है। इस योजना पर 1.27 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जबकि इसके माध्यम से लगभग 4 लाख करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।सरकार का अनुमान है कि योजना अवधि के दौरान 2 लाख करोड़ रुपये मूल्य का सेमीकंडक्टर उत्पादन किया जाएगा।नई योजना में चिप डिजाइन से लेकर निर्माण, कच्चे माल की आपूर्ति और पूरी वैल्यू चेन को शामिल किया गया है। सरकार का लक्ष्य भारत को सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।
यूरिया उत्पादन बढ़ाने पर सरकार का फोकस
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय निवेश नीति-2026 को भी मंजूरी दी है।इस नीति का उद्देश्य देश में एक करोड़ टन अतिरिक्त यूरिया उत्पादन क्षमता विकसित करना और उर्वरक उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना है।नई नीति के तहत प्राकृतिक गैस आधारित 8 से 9 नए यूरिया संयंत्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
रेलवे की दो बड़ी परियोजनाओं को भी हरी झंडी
कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) ने रेलवे मंत्रालय की दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन पर लगभग 3,907 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।इन परियोजनाओं में शामिल हैं—
पारादीप–हरिदासपुर रेलवे लाइन का दोहरीकरण।
राजखरसावां–डांगोआपोसी के बीच चौथी रेलवे लाइन का निर्माण।
सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से ट्रेनों की गति बढ़ेगी, रेल नेटवर्क की क्षमता मजबूत होगी, भीड़भाड़ कम होगी और यात्रियों को अधिक समयबद्ध एवं बेहतर रेल सेवाएं मिल सकेंगी।