भोपाल/इंदौर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में भगवान बलराम के चित्र का अनावरण कर बलराम कृषि महोत्सव का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि किसान कल्याण वर्ष-2026 के तहत प्रदेश सरकार किसानों के हित में कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू कर रही है। आगामी छह महीनों तक विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को नई तकनीक, योजनाओं और सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। किसानों की आय बढ़ाने के लिए उद्यानिकी, एमएसएमई समेत 16 विभागों को एकीकृत कर व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों, कृषि विषयक डिजिटल कंटेंट तैयार करने वाले सोशल मीडिया क्रिएटर्स तथा बोर्ड परीक्षा के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया गया।
उद्योगों के साथ कृषि विकास पर भी सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में वर्ष 2025 को उद्योग एवं रोजगार के लिए समर्पित किया गया था। इसी क्रम में प्रदेश के संभाग, जिला और तहसील स्तर पर औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम आयोजित किए गए। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश आज तेजी से औद्योगिक प्रगति कर रहा है और कई प्रतिष्ठित औद्योगिक समूह राज्य में निवेश कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को नदियों का मायका कहा जाता है, जहां 250 से अधिक नदियां बहती हैं। सरकार की प्रतिबद्धता के कारण इंदौर को मां नर्मदा का जल उपलब्ध कराया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों ने नर्मदा परियोजनाओं को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं दी, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से इंदिरा सागर परियोजना को नई गति मिली और इसका लाभ मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों को भी प्राप्त हुआ।
किसानों को उपज का बेहतर मूल्य दिलाने की दिशा में काम
मुख्यमंत्री ने कहा कि नर्मदा परियोजनाओं से मालवा और निमाड़ क्षेत्र को सिंचाई का बड़ा लाभ मिला है। वर्तमान में प्रदेश को 31 प्रतिशत पानी और 57 प्रतिशत बिजली मात्र 85 पैसे प्रति यूनिट की दर से उपलब्ध हो रही है। उन्होंने बताया कि कभी प्रदेश में सिंचित क्षेत्र केवल साढ़े सात लाख हेक्टेयर था, जो अब बढ़कर लगभग 65 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुका है। पिछले ढाई वर्षों में ही 10 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि सिंचाई के दायरे में आई है।उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए लगातार प्रयासरत है। गेहूं का समर्थन मूल्य 2625 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच चुका है, जबकि सोयाबीन उत्पादकों को भावांतर योजना के माध्यम से भी लाभ दिया जा रहा है।
खेत से बाजार तक मजबूत होगा कृषि इकोसिस्टम
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है और ऋण चुकाने की समयसीमा भी 31 मार्च तक बढ़ा दी गई है। उन्होंने बताया कि केन-बेतवा लिंक परियोजना बुंदेलखंड के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जबकि पार्वती-चंबल-कालीसिंध (पीकेसी) परियोजना से पश्चिमी मध्यप्रदेश के 13 जिलों को पर्याप्त सिंचाई और पेयजल मिलेगा, जिसमें इंदौर भी शामिल है।उन्होंने कहा कि कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जा रही हैं। सरकार खेत से कारखाने और कारखाने से बाजार तक एक मजबूत कृषि इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि उज्जैन में पेप्सिको की यूनिट स्थापित होने से प्रदेश के 32 जिलों के आलू उत्पादक किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही मुख्यमंत्री सुगम परिवहन योजना के तहत बेहतर परिवहन सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
पशुपालन और डेयरी से बढ़ेगी किसानों की अतिरिक्त आय
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। प्रदेश में दूध उत्पादन की हिस्सेदारी 8 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के तहत 40 लाख रुपये तक की डेयरी इकाई स्थापित करने पर 10 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है।उन्होंने बताया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में गोशालाओं का संचालन किया जा रहा है, जिन्हें प्रति गाय 40 रुपये प्रतिदिन का अनुदान दिया जा रहा है। फसलों को नुकसान पहुंचाने वाली निराश्रित गायों को आधुनिक तकनीक की मदद से पकड़कर गांधी सागर अभयारण्य में छोड़ा जाएगा।मुख्यमंत्री ने कहा कि नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के साथ हुए एमओयू का लाभ प्रदेश के पशुपालकों को मिल रहा है, जिससे दूध के दाम में 8 से 10 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा मत्स्य पालन क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए भी राज्य सरकार नई योजनाएं लागू कर रही है।