अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह रूस से तेल खरीदने वाले देशों को दी गई प्रतिबंधों से छूट जल्द खत्म कर सकता है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सीनेट की विदेश संबंध समिति के समक्ष कहा कि अमेरिका की मूल नीति रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंध लगाने की रही है और सरकार चाहती है कि यह छूट जल्द से जल्द समाप्त हो। मार्च 2026 में अमेरिका ने कुछ देशों को रूसी तेल खरीद पर लगे प्रतिबंधों से अस्थायी राहत दी थी। इस छूट को बाद में दो बार बढ़ाया गया और इसकी मौजूदा अवधि 17 जून तक है। भारत भी उन देशों में शामिल है जिन्हें इस छूट का लाभ मिला है।
भारत समेत कई देशों पर पड़ सकता है असर
रूबियो ने कहा कि यह राहत वैश्विक तेल आपूर्ति को बनाए रखने और कीमतों में उछाल को रोकने के लिए दी गई थी। हालांकि अमेरिका अब हालात सामान्य होने पर इस व्यवस्था को समाप्त करना चाहता है। अंतिम फैसला अमेरिकी वित्त विभाग द्वारा लिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि छूट समाप्त होती है तो भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए रूसी कच्चे तेल की खरीद महंगी हो सकती है, जिसका असर घरेलू ईंधन कीमतों और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने की कोशिश
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर कई प्रतिबंध लगाए हैं। इसके बावजूद वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित न हो, इसके लिए अमेरिका समय-समय पर अस्थायी छूट देता रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बीच इन छूटों को अब तक कई बार बढ़ाया जा चुका है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि वह रूस पर आर्थिक दबाव बनाए रखने के साथ-साथ वैश्विक तेल बाजार में किसी बड़ी उथल-पुथल से भी बचना चाहता है।