रायपुर। छत्तीसगढ़ में बस यात्रियों पर जल्द ही किराया वृद्धि का बोझ पड़ सकता है। प्रदेश में बस किराया बढ़ाने की मांग जोर पकड़ रही है और मामला अब शासन स्तर तक पहुंच गया है। इस बीच कई रूटों पर निजी बस ऑपरेटरों द्वारा यात्रियों से 200 से 400 रुपये तक अतिरिक्त किराया वसूले जाने की शिकायतें सामने आई हैं, जबकि सरकार की ओर से अभी तक किसी प्रकार की आधिकारिक किराया वृद्धि की घोषणा नहीं की गई है।
किराया वृद्धि पर सरकार विचाराधीन
परिवहन विभाग और राज्य सरकार इस पूरे मामले पर गंभीरता से विचार कर रही है। किराया पुनरीक्षण को लेकर विभाग स्तर पर मंथन शुरू हो चुका है। यात्रियों की शिकायतों और बस ऑपरेटरों की मांगों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है।
परिवहन मंत्री तक पहुंचा मामला
छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ ने हाल ही में परिवहन मंत्री को ज्ञापन सौंपकर बस किराया बढ़ाने की मांग रखी थी। इसके बाद मंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर पूरे मामले की समीक्षा की। मंत्री ने अधिकारियों को विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
बस ऑपरेटरों से मांगा गया प्रस्ताव
परिवहन विभाग ने बस ऑपरेटरों से प्रस्तावित किराया वृद्धि का आधार और संचालन लागत से जुड़ी विस्तृत जानकारी मांगी है। विभाग यह आंकलन कर रहा है कि किराया बढ़ाने की मांग कितनी व्यावहारिक और आवश्यक है।
यात्रियों से अवैध वसूली की शिकायत
प्रदेश के कई रूटों पर यात्रियों से निर्धारित किराए से 200 से 400 रुपये तक अधिक वसूली की शिकायतें मिली हैं। यात्रियों का आरोप है कि सरकार की अनुमति के बिना ही कुछ बस संचालक मनमाने तरीके से किराया बढ़ा रहे हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अभी तक कोई आधिकारिक किराया वृद्धि आदेश जारी नहीं किया गया है।
आर्थिक दबाव में बस ऑपरेटर
छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ का कहना है कि डीजल की बढ़ती कीमतों, रखरखाव खर्च और स्पेयर पार्ट्स की लागत में लगातार वृद्धि के कारण बस संचालन महंगा हो गया है। उनका कहना है कि मौजूदा किराए पर सेवाएं जारी रखना मुश्किल हो रहा है।
सरकार संतुलन बनाने की कोशिश में
अपर परिवहन आयुक्त के अनुसार किराया पुनरीक्षण प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन है और जल्द ही इस पर निर्णय लिया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य है कि बस ऑपरेटरों की आर्थिक स्थिति और यात्रियों पर पड़ने वाले बोझ के बीच संतुलन बनाया जाए।