नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रक्रिया को लेकर उठे विवाद के बाद केंद्र सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। छात्रों की शिकायतों और मूल्यांकन प्रक्रिया पर उठे सवालों के बीच बोर्ड के चेयरमैन और सचिव को हटा दिया गया है।
टेंडर और खरीद प्रक्रिया की होगी जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने ऑन स्क्रीन मार्किंग सेवा से जुड़े टेंडर और खरीद प्रक्रिया की जांच के आदेश दिए हैं। इसके लिए एक विशेष जांच समिति का गठन किया गया है, जो पूरी प्रक्रिया की समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। शिकायतों में मूल्यांकन प्रणाली और तकनीकी प्रक्रियाओं को लेकर कई सवाल उठाए गए थे।
री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर साइबर हमले की कोशिश
इसी बीच CBSE के री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर साइबर हमले की भी कोशिश की गई। बोर्ड के अनुसार, पोर्टल शुरू होते ही महज दो मिनट के भीतर करीब 15 लाख एक्सेस प्रयास दर्ज किए गए। इसके अलावा एक लाख से अधिक बार सिस्टम की फाइलों तक अनधिकृत पहुंच बनाने का प्रयास किया गया।
साइबर अटैक के बावजूद जारी रही प्रक्रिया
CBSE ने बताया कि साइबर हमले की कोशिशों के बावजूद पोर्टल सुचारू रूप से काम करता रहा। दोपहर 3 बजे तक 16 हजार से अधिक छात्रों ने पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर दिया था। यह पोर्टल सोमवार से शुरू होना था और तकनीकी टीम ने समय रहते सुरक्षा उपायों को सक्रिय कर दिया।
परिणाम के बाद बढ़ी थीं छात्रों की शिकायतें
गौरतलब है कि CBSE ने 13 मई को कक्षा 12वीं के परीक्षा परिणाम घोषित किए थे। इस वर्ष पहली बार उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली के माध्यम से किया गया था। परिणाम जारी होने के बाद कई छात्रों ने प्राप्त अंकों और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर शिकायतें दर्ज कराईं, जिसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू की गई।
पारदर्शिता सुनिश्चित करने की तैयारी
सरकार का कहना है कि मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में छात्रों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।