भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार ने मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में दो बड़े जनहितकारी फैसलों को मंजूरी दी। पहला फैसला स्वामित्व योजना के तहत लाखों परिवारों को जमीन की रजिस्ट्री कराकर वैध दस्तावेज देने का है, जबकि दूसरा फैसला सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को तैयार सिली-सिलाई यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने से जुड़ा है। सरकार का दावा है कि इन फैसलों से आम नागरिकों और विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा।
46.80 लाख लोगों को जमीन की रजिस्ट्री कराएगी सरकार
कैबिनेट बैठक में स्वामित्व योजना को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। इसके तहत प्रदेश के 46.80 लाख से अधिक लोगों को उनकी जमीन की रजिस्ट्री कराकर कानूनी दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएंगे। अब तक इन लोगों को केवल पट्टे या स्वामित्व प्रमाण पत्र दिए गए थे, लेकिन रजिस्ट्री नहीं होने के कारण कई सरकारी और वित्तीय प्रक्रियाओं में दिक्कतें आती थीं। सरकार का मानना है कि रजिस्ट्री होने के बाद लाभार्थियों को अपनी संपत्ति पर पूर्ण कानूनी अधिकार मिल सकेगा। इस योजना को लागू करने के लिए सरकार करीब 3800 करोड़ रुपये खर्च करेगी। खास बात यह है कि लाभार्थियों को किसी प्रकार का पंजीयन शुल्क या पंचायत उपकर नहीं देना होगा। पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। इस फैसले को ग्रामीण और आबादी क्षेत्र में रहने वाले लाखों परिवारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
जमीन के दस्तावेज मिलने से मिलेगा आर्थिक लाभ
सरकार का कहना है कि रजिस्टर्ड दस्तावेज मिलने के बाद लोगों को अपनी संपत्ति का आर्थिक रूप से बेहतर उपयोग करने का अवसर मिलेगा। जिन परिवारों के पास अब तक केवल कब्जा या पट्टा था, वे अब अपनी जमीन के आधार पर बैंक से ऋण लेने और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के पात्र बन सकेंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि संपत्ति के वैध दस्तावेज मिलने से जमीन संबंधी विवादों में भी कमी आएगी। इसके अलावा लोगों को अपनी संपत्ति बेचने, हस्तांतरण करने या अन्य कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करने में भी आसानी होगी। सरकार इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रही है।
ड्रोन और सैटेलाइट सर्वे से हुई पहचान
स्वामित्व योजना के तहत केंद्र सरकार की मदद से ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक का उपयोग कर प्रदेशभर में संपत्तियों का सर्वे कराया गया था। इस आधुनिक तकनीक के जरिए आबादी क्षेत्र में स्थित घरों और अन्य संपत्तियों की सटीक मैपिंग की गई। इसके बाद संबंधित लोगों की पहचान कर उन्हें स्वामित्व प्रमाण पत्र जारी किए गए थे। सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के सभी 55 जिलों में 48.32 लाख निजी संपत्तियों और लगभग 19 लाख शासकीय संपत्तियों को चिन्हित किया गया है। अब अगले चरण में इन संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों को विधिवत रजिस्टर्ड कर लाभार्थियों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सरकार उठाएगी पंजीयन शुल्क और उपकर का खर्च
कैबिनेट ने फैसला किया है कि इस पूरी प्रक्रिया में लगने वाला खर्च लाभार्थियों से नहीं लिया जाएगा। पंजीयन शुल्क, स्टांप ड्यूटी से संबंधित देय राशि और पंचायत उपकर का भुगतान राज्य सरकार करेगी। इससे लाखों लोगों को आर्थिक बोझ से राहत मिलेगी और वे बिना किसी अतिरिक्त खर्च के अपनी संपत्ति के कानूनी दस्तावेज प्राप्त कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि यदि यह खर्च लोगों पर डाला जाता तो बड़ी संख्या में गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार इसका लाभ नहीं ले पाते। इसलिए राज्य सरकार ने खुद यह वित्तीय जिम्मेदारी उठाने का निर्णय लिया है। इससे योजना के सफल क्रियान्वयन में भी मदद मिलेगी।
अब छात्रों को मिलेगी तैयार सिली-सिलाई यूनिफॉर्म
कैबिनेट बैठक में स्कूल शिक्षा विभाग के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। इसके तहत कक्षा 1 से 8वीं तक के विद्यार्थियों को अब यूनिफॉर्म खरीदने के लिए नकद राशि नहीं दी जाएगी। पहले छात्रों के खातों में डीबीटी के माध्यम से 600 रुपये भेजे जाते थे, ताकि वे अपनी यूनिफॉर्म खरीद सकें। हालांकि, सरकार को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कई मामलों में निर्धारित राशि का उपयोग यूनिफॉर्म खरीदने में नहीं हो रहा था। इसके अलावा यूनिफॉर्म की गुणवत्ता और समय पर उपलब्धता को लेकर भी समस्याएं सामने आ रही थीं। इन्हीं कारणों को देखते हुए सरकार ने नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है।
टेंडर के जरिए खरीदा जाएगा कपड़ा
नई व्यवस्था के अनुसार राज्य सरकार गारमेंट उद्योग और अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से टेंडर प्रक्रिया द्वारा कपड़ा खरीदेगी। इसके बाद निर्धारित मानकों के अनुसार विद्यार्थियों के लिए यूनिफॉर्म सिलवाकर स्कूलों के माध्यम से वितरित की जाएगी। इससे सभी बच्चों को एक जैसी और बेहतर गुणवत्ता की ड्रेस मिल सकेगी। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और विद्यार्थियों को समय पर यूनिफॉर्म उपलब्ध हो सकेगी। साथ ही स्थानीय गारमेंट उद्योग और सिलाई इकाइयों को भी रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। इससे योजना का सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा।
गेहूं खरीदी और यूसीसी पर भी हुई चर्चा
कैबिनेट बैठक में प्रदेश में हुई गेहूं खरीदी की भी समीक्षा की गई। सरकार ने दावा किया कि इस वर्ष मध्य प्रदेश ने देश में सबसे अधिक गेहूं खरीदी कर नया रिकॉर्ड बनाया है। बैठक में किसानों को भुगतान, भंडारण व्यवस्था और खरीद प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की गई। इसके अलावा समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर गठित समिति की प्रगति रिपोर्ट पर भी विचार किया गया। सरकार ने बताया कि विभिन्न वर्गों और संगठनों से सुझाव लेने का काम जारी है और यह प्रक्रिया 30 जुलाई तक पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद प्राप्त सुझावों के आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी।