पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच चुनाव आयोग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्य में अब तक 510.10 करोड़ रुपये की अवैध सामग्री जब्त की है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, यह जब्ती नकदी, अवैध शराब, ड्रग्स, कीमती धातु और विभिन्न प्रकार की फ्रीबीज़ को मिलाकर की गई है। आयोग का कहना है कि इस बार चुनाव को पूरी तरह हिंसा-मुक्त, डर-मुक्त और प्रलोभन-मुक्त बनाने के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
2021 के मुकाबले कहीं ज्यादा जब्ती
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में कुल 339 करोड़ रुपये की जब्ती हुई थी, जबकि 2026 में यह आंकड़ा 510 करोड़ रुपये को पार कर चुका है। यानी इस बार चुनावी सख्ती और निगरानी पहले से कहीं अधिक मजबूत है। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि प्रशासन चुनावी अनियमितताओं को लेकर बेहद सतर्क है।
नकदी से लेकर ड्रग्स तक, क्या-क्या हुआ जब्त
जारी रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल में अब तक 30 करोड़ रुपये नकद, 48,46,183 लीटर शराब, 126.85 करोड़ रुपये मूल्य की शराब, 110.12 करोड़ रुपये के ड्रग्स, 58.28 करोड़ रुपये की कीमती धातुएं और 184.85 करोड़ रुपये की फ्रीबीज़/अन्य सामग्री जब्त की गई है। यह आंकड़े चुनावी प्रक्रिया में धनबल और प्रलोभन के इस्तेमाल की गंभीरता को दर्शाते हैं।
2728 फ्लाइंग स्क्वॉड और 3142 सर्विलांस टीमें तैनात
निर्वाचन आयोग ने बताया कि पूरे राज्य में 2,728 फ्लाइंग स्क्वॉड टीम (FSTs) और 3,142 स्टैटिक सर्विलांस टीम (SSTs) तैनात की गई हैं। इनका उद्देश्य शिकायतों का 100 मिनट के भीतर समाधान करना और विभिन्न स्थानों पर अचानक नाका जांच कर अवैध गतिविधियों को रोकना है। विशेष रूप से अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और वितरण के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
चुनाव आयोग का फोकस—हिंसा मुक्त और निष्पक्ष मतदान
आयोग ने कहा कि मुख्य सचिवों, डीजीपी, सीईओ और प्रवर्तन एजेंसियों के प्रमुखों के साथ कई समीक्षा बैठकें की गई हैं। सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि चुनाव में किसी भी प्रकार की हिंसा, डराने-धमकाने या वोटरों को लालच देने की कोशिश को सख्ती से रोका जाए। पश्चिम बंगाल जैसे संवेदनशील राज्य में यह निगरानी और भी अहम मानी जा रही है।
राजनीतिक दलों में बढ़ी बेचैनी
इतनी बड़ी मात्रा में जब्ती के बाद राज्य की राजनीति भी गर्म हो गई है। विपक्षी दल इसे सत्ताधारी दलों की चुनावी रणनीति से जोड़ रहे हैं, जबकि प्रशासन इसे निष्पक्ष चुनाव की दिशा में आवश्यक कदम बता रहा है। चुनाव आयोग की इस कार्रवाई से साफ है कि इस बार बंगाल चुनाव केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक परीक्षा भी बन गया है।