कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के मतदान से ठीक पहले राज्य के कई हिस्सों में एक अजीब सा डर और भ्रम का माहौल देखा जा रहा है। 'SIR' (State Identity Register) लागू होने के बाद यह पहला चुनाव है, और गलियारों में चर्चा है कि यदि इस बार किसी ने मतदान नहीं किया, तो उसका नाम हमेशा के लिए मतदाता सूची से काट दिया जाएगा। इस अफवाह का असर इतना गहरा है कि दूसरे राज्यों में काम करने वाले प्रवासी मजदूर भारी खर्च उठाकर अपने गांवों की ओर लौट रहे हैं।
प्रवासी मजदूरों में नागरिकता खोने का डर
विभिन्न राज्यों से लौट रहे मजदूरों का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर अपना वोट गंवाना नहीं चाहते। उनके मन में यह डर बैठ गया है कि वोट न देने का मतलब 'नागरिकता' पर खतरा हो सकता है। हालांकि मतदान करना हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार और कर्तव्य है, लेकिन इसके पीछे छिपा 'डर' चिंता का विषय बना हुआ है।
क्या कहता है नियम? क्या वाकई नाम कट जाएगा?
चुनाव आयोग के स्पष्ट नियमों के अनुसार, केवल मतदान न करने के आधार पर किसी का नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाया जा सकता। मतदान करना पूरी तरह से व्यक्तिगत निर्णय और स्वैच्छिक प्रक्रिया है। निर्वाचन आयोग किसी का नाम केवल इन स्थितियों में हटाता है:
1. यदि मतदाता की मृत्यु हो गई हो।
2. यदि मतदाता ने अपना निवास स्थान स्थायी रूप से बदल लिया हो और आयोग सत्यापन (Verification) न कर पाए।
3. यदि कोई मतदाता दो अलग-अलग जगहों की वोटर लिस्ट में पंजीकृत पाया जाए।
अतः, 'SIR' होने के कारण वोट न देने पर नाम कटने की बात पूरी तरह निराधार है। मतदाता बिना किसी डर के, अपनी इच्छाशक्ति से मतदान करने जा सकते हैं।
कल 142 सीटों पर महामुकाबला
बता दें कि इस साल बंगाल चुनाव दो चरणों में हो रहे हैं। पहले चरण की 152 सीटों पर रिकॉर्ड मतदान के बाद, कल (बुधवार) दूसरे चरण में 142 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। इस चरण में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अपनी सीट भवानीपुर सहित 7 जिलों का भविष्य तय होगा। प्रशासन ने शांतिपूर्ण मतदान के लिए कड़े इंतजाम किए हैं और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।