कोलकाता : पश्चिम बंगाल में साल 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में मची ऐतिहासिक भगदड़ और आंतरिक संकट के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बेहद आक्रामक और भावुक अंदाज में पलटवार किया है। बुधवार को सोशल मीडिया (Facebook Live) पर लाइव आकर ममता बनर्जी ने साफ कर दिया कि जो लोग पार्टी छोड़कर जा रहे हैं, वे केंद्रीय एजेंसियों के डर से भाग रहे हैं और इसके लिए भतीजे अभिषेक बनर्जी का नाम सिर्फ एक 'सस्ता बहाना' के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
मदन मित्रा और अनुब्रत मंडल जैसे दिग्गजों द्वारा ममता का साथ छोड़कर बागी ऋतब्रत बनर्जी के खेमे में शामिल होने और इसके लिए अभिषेक बनर्जी को जिम्मेदार ठहराने पर ममता ने दो टूक कहा, "अभिषेक कोई बहाना नहीं है, वह मैदान छोड़कर भागा नहीं है बल्कि बाघ की तरह लड़ रहा है।"
'बाघ की तरह लड़ रहा है अभिषेक, वह 50 साल राजनीति करेगा'
दल बदलुओं पर सीधा निशाना साधते हुए ममता बनर्जी ने कहा: "अभिषेक अचानक आप लोगों के लिए बहुत बुरा हो गया? यह सिर्फ पार्टी छोड़ने का आपका एक बहाना है। याद कीजिए जब उसकी पत्नी अपने डेढ़ साल के बच्चे को गोद में लेकर सीबीआई (CBI) दफ्तर में पूछताछ के लिए गई थीं, तब आपकी नीतियां कहां थीं? आज अभिषेक के खिलाफ 25-30 मामले दर्ज किए गए हैं, फिर भी उसने मैदान नहीं छोड़ा। अगर वह बीजेपी और एजेंसियों के साथ 'सेटिंग' कर लेता, तो सबसे ज्यादा राहत उसे ही मिलती। लेकिन उसने सिर झुकाने के बजाय लड़ना चुना। याद रखिए, आने वाले 50 साल वही इस देश की राजनीति करेंगे।"
'एजेंसियों के डर से वाशिंग मशीन में जा रहे हैं नेता'
ममता बनर्जी ने स्वीकार किया कि पार्टी के कुछ लोगों ने उनके साथ विश्वासघात किया है। जनता से हाथ जोड़कर माफी मांगते हुए उन्होंने कहा, "जिन्हें हमने अपने प्रतीक (TMC सिंबल) पर चुनाव जिताया, उनमें से कई लोगों के पास बहुत सारा 'लागेज-बैगेज' (अवैध संपत्ति या मामले) था, जिसकी मुझे जानकारी नहीं थी। आज वे ईडी-सीबीआई के डर से बीजेपी की वाशिंग मशीन में जाकर साधु बन रहे हैं। उन्हें जाने दीजिए। जो कार्यकर्ता खून बहाकर ब्लॉक और बूथों पर टिके हैं, वही मेरी असली सोने की खान हैं।"
मदन मित्रा के बागी खेमे में जाने का नाम लिए बिना ममता ने कहा, "डरा-धमकाकर लोगों को ले जाया जा रहा है। नेताओं के बेटों और पत्नियों के नाम पर नोटिस भेजे जा रहे हैं। आज जो एक और नेता गया है, मुझे पहले ही पता चल गया था कि उनके परिवार को ईडी ने समन भेजा है। इसीलिए उन्हें पहले ही सभी पदों से हटा दिया गया था।"
1997 याद है.2026 में भी शून्य से शुरू कर सकती हूं
अपनी राजनीतिक यात्रा और संघर्षों को याद करते हुए ममता बनर्जी ने विरोधियों को चेतावनी दी कि वे उन्हें कमजोर न समझें। उन्होंने कहा: "1 जनवरी 1998 को हमें पार्टी का सिंबल मिला था। 1997 में जब नई पार्टी बनाई, तब मैं अकेली थी। चुनाव लड़ा तो 8 सांसद जीते, 1999 में 9 हुए। 2004 के लोकसभा चुनाव में मैं संसद में पूरी तरह अकेली (1 सांसद) हो गई थी। लेकिन मैं फिनिक्स पक्षी की तरह हर बार शून्य से उठ खड़ी हुई हूं। आज तो हमारे पास लोकसभा में 8 और राज्यसभा में 10 सांसद हैं, कई विधायक हैं। जब मैं तब लड़ सकती थी, तो 2026 में भी शून्य से दोबारा शुरुआत करने का दम रखती हूं।"
अदालती शर्तों के साथ 'बिड़ला तारामंडल में ही होगी 21 जुलाई की रैली
उच्च न्यायालय द्वारा धर्मतला में सभा की अनुमति न दिए जाने के बाद ममता बनर्जी ने एलान किया कि इस साल कालीघाट तृणमूल की पारंपरिक 21 जुलाई की 'शहीद दिवस' रैली बिड़ला तारामंडल (Birla Planetarium) के सामने आयोजित की जाएगी।
ममता ने कहा, "अदालत की कुछ शर्तों के साथ बिड़ला प्लैनेटोरियम के सामने सभा होगी। मैं हर साल की तरह 20 जुलाई को खुद जगह का मुआयना करने जाऊंगी। मैं पुलिस से अनुरोध करती हूं कि वे यह सुनिश्चित करें कि बीजेपी और 'सेटिंग पार्टियां' वहां कोई हंगामा न खड़ा कर सकें। वे शायद हमारे डेकोरेटर्स और लाउडस्पीकर वालों को भी डराएंगे, लेकिन याद रखें—अगर जरूरत पड़ी तो मैं बिना माइक के, खाली गले से भी जनसभा करूंगी। जब कह दिया है, तो मीटिंग दोपहर 3 बजे तक होकर रहेगी।"