कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आए ऐतिहासिक बदलाव के बाद अब राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था भी अपने पुराने और गौरवशाली पते पर लौटने को तैयार है। साल 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सचिवालय को नवान्न (हावड़ा) स्थानांतरित किया था, लेकिन अब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई सरकार ने दोबारा 'महाकरण' (Writers' Building) को ही सत्ता का केंद्र बनाने का फैसला किया है।
युद्धस्तर पर शुरू हुआ मरम्मत का काम
4 मई को चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद से ही राइटर्स बिल्डिंग के जीर्णोद्धार का काम तेज कर दिया गया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने मुख्य ब्लॉक की मरम्मत और नवीनीकरण शुरू कर दिया है। पिछले 13 सालों से यहाँ सन्नाटा पसरा था और मरम्मत का काम कछुआ गति से चल रहा था, लेकिन अब इस 'वृद्ध' इमारत को नया जीवन देने की तैयारी है।
भगवा रोशनी में नहाई ऐतिहासिक इमारत
शपथ ग्रहण से पहले ही शताब्दी पुरानी इस इमारत को केसरिया (कमला) रोशनी से सजाया गया है। इमारत की दीवारों पर नया रंग चढ़ाया जा रहा है। सचिवालय के भीतर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और अन्य भाजपा नेताओं के बड़े-बड़े फ्लैक्स लगा दिए गए हैं। पुराने मुख्यमंत्री की नामपट्टिका हटा दी गई है। दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी उस कमरे में नहीं बैठेंगे जहाँ ज्योति बसु या ममता बनर्जी बैठती थीं, बल्कि उनके लिए दूसरी मंजिल पर एक नया कक्ष तैयार किया जा रहा है।
क्या-क्या बदल रहा है महाकरण में?
आधुनिक लिफ्ट: पुरानी लिफ्टों की जगह अब अत्याधुनिक स्वचालित वीआईपी लिफ्ट लगाई गई है।
फर्श और छत: पुरानी टाइल्स को हटाकर आधुनिक क्रीम रंग की टाइल्स लगाई जा रही हैं। गलियारों और मंत्रियों के कमरों में नए लकड़ी के दरवाजे लगाए गए हैं।
सुरक्षा: कोलकाता पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने पूरी इमारत का मुआयना किया है। बिजली की नई लाइनें बिछाई गई हैं और संचार व्यवस्था को दुरुस्त किया गया है।
13 साल का अधूरा इंतज़ार
ममता सरकार ने 2013 में कहा था कि वे मरम्मत के लिए 5 महीने के लिए नवान्न जा रही हैं, लेकिन वह अंतराल 13 साल लंबा खिंच गया। अब जब भाजपा ने अपने चुनावी वादे के मुताबिक शासन को वापस लालबाड़ी (Writers) लाने का निर्णय लिया है, तो करीब 6 हजार कर्मियों की आवाजाही से यह इलाका फिर से गुलजार होने वाला है।