जनवरी महीने में पड़ने वाली पूर्णिमा को ‘वुल्फ मून’ कहा जाता है। पुराने समय में उत्तरी गोलार्ध के बर्फीले क्षेत्रों में सर्दियों के दौरान भूखे भेड़ियों के झुंडों के जोर-जोर से हुआं-हुआं करने की आवाजें सुनी जाती थीं। इसी वजह से इस महीने की पूर्णिमा का यह नाम प्रचलित हो गया। वैज्ञानिक रूप से तो यह एक सामान्य पूर्णिमा ही है, लेकिन अपनी ऐतिहासिक मान्यताओं और सुनहरी चमक के कारण यह खास मानी जाती है।
3 जनवरी को सूर्य के सबसे करीब पहुँचेगी पृथ्वी
इसी रात एक और दिलचस्प घटना घटेगी—पृथ्वी अपनी कक्षा में घूमते हुए सूर्य के सबसे नज़दीकी बिंदु पर पहुँच जाएगी। इस स्थिति को अंग्रेज़ी में Perihelion (उपसौर) कहा जाता है। भारतीय समयानुसार यह घटना लगभग रात 10:45 बजे होगी। इस दौरान सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी घटकर लगभग 147.1 मिलियन किलोमीटर रह जाएगी, जो साल भर की सबसे कम दूरी होती है।
क्या इस वजह से मौसम ज्यादा गर्म हो जाता है?
सवाल उठता है कि जब पृथ्वी सूर्य के सबसे नज़दीक होती है, तब भी जनवरी में ठंड क्यों पड़ती है? इसका कारण है—पृथ्वी का झुकाव। पृथ्वी अपनी धुरी पर झुकी हुई है, और वर्तमान समय में उत्तरी गोलार्ध सूर्य से थोड़ा दूर झुका हुआ रहता है। इसी कारण भारत सहित कई देशों में इस समय सर्दी रहती है, जबकि दक्षिणी गोलार्ध में गर्मी होती है। यानी दूरी से ज्यादा असर पृथ्वी के झुकाव का होता है।
तेज़ गति से यात्रा करती पृथ्वी
उपसौर के समय पृथ्वी अपनी कक्षा में सबसे तेज़ गति से घूमती है—लगभग 30.27 किमी प्रति सेकंड। वहीं जब 6 जुलाई 2026 को पृथ्वी सूर्य से सबसे दूर होगी (जिसे Aphelion — अपसौर कहते हैं), तब इसकी गति थोड़ी कम हो जाती है। गति में यह अंतर गुरुत्वाकर्षण के कारण होता है—सूर्य के करीब होने पर खिंचाव ज्यादा होता है।
आसमान देखने वालों के लिए सुनहरा मौका
3 जनवरी की रात साफ आसमान होने पर चंद्रमा बेहद चमकीला और बड़ा नजर आएगा। यह दृश्य नंगी आंखों से आसानी से देखा जा सकेगा। टेलीस्कोप या दूरबीन होने पर यह अनुभव और भी शानदार बन सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसी घटनाएँ अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति लोगों की जिज्ञासा और समझ बढ़ाने का बेहतरीन अवसर हैं।
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