Bahula Chaturthi 2026: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को बहुला चतुर्थी या बहुला चौथ का व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत भगवान गणेश, भगवान श्रीकृष्ण और गौमाता की पूजा से जुड़ा है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है और संतान के सुख-कल्याण की कामना पूरी होती है। इस दिन गाय और बछड़े की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। अगर आप भी बहुला चौथ का व्रत रखने जा रहे हैं, तो पूजा का शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय का समय और पूजा की पूरी विधि पहले से नोट कर लें।
बहुला चतुर्थी 2026 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 31 अगस्त 2026, सोमवार को सुबह 8:51 बजे शुरू होगी। वहीं इसका समापन 1 सितंबर 2026, मंगलवार को सुबह 7:41 बजे होगा। उदयातिथि के आधार पर बहुला चतुर्थी का व्रत 31 अगस्त को रखा जाएगा।
बहुला चौथ 2026 के शुभ मुहूर्त
बहुला चौथ पर पूजा-पाठ के लिए अलग-अलग चौघड़िया का समय इस प्रकार है-
अमृत चौघड़िया: सुबह 5:58 बजे से 7:34 बजे तक
शुभ चौघड़िया: सुबह 9:10 बजे से 10:45 बजे तक
लाभ चौघड़िया: दोपहर 3:33 बजे से शाम 5:08 बजे तक
अमृत चौघड़िया: शाम 5:08 बजे से 6:44 बजे तक
बहुला चौथ पर कब होगा चंद्रोदय?
बहुला चतुर्थी के व्रत में चंद्र दर्शन और चंद्रमा को अर्घ्य देने का भी विशेष महत्व माना जाता है। पंचांग के अनुसार 31 अगस्त को रात करीब 8:29 बजे चंद्रोदय होगा। चंद्र दर्शन के बाद व्रती महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण कर सकती हैं।
बहुला चौथ पर गौमाता की पूजा कैसे करें?
बहुला चौथ के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें। सुबह भगवान गणेश की विधिवत पूजा करें। शाम के समय गाय और बछड़े की पूजा की जाती है। इसके लिए सबसे पहले उन्हें स्नान कराएं और साफ स्थान पर पूजा की तैयारी करें। गौमाता को रोली लगाएं और अक्षत अर्पित करें। इसके बाद घर में तैयार किए गए पकवानों का भगवान गणेश, श्रीकृष्ण और गौमाता को भोग लगाएं। बहुला चौथ की कथा का श्रवण या वाचन करें और फिर गाय-बछड़े की प्रदक्षिणा करें। पूजा के दौरान परिवार की सुख-शांति, संतान के कल्याण और समृद्धि की कामना करें। अंत में गौमाता और बछड़े की आरती करें।
चंद्र दर्शन के बाद करें व्रत का पारण
शाम की पूजा पूरी करने के बाद व्रती चंद्रोदय का इंतजार करें। रात करीब 8:29 बजे चंद्रमा के दर्शन होने पर दूध से चंद्रमा को अर्घ्य दें। इसके बाद भगवान गणेश और श्रीकृष्ण का स्मरण कर व्रत का पारण करें।
बहुला चौथ का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं में बहुला चौथ को संतान सुख और परिवार की खुशहाली से जोड़कर देखा जाता है। इस दिन भगवान गणेश, श्रीकृष्ण तथा गाय-बछड़े की पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और संतान के स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना पूरी होती है।
नोट: पूजा के मुहूर्त और चंद्रोदय का समय स्थान के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है। स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि कर लेना उचित है।