वैदिक ज्योतिष में देवगुरु बृहस्पति को शुभता, ज्ञान, धर्म और विवाह का प्रमुख कारक माना जाता है। पंचांग के अनुसार 15 जुलाई 2026 की शाम 7:59 बजे गुरु ग्रह अस्त हो गए हैं। गुरु के अस्त होने के साथ ही विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, उपनयन और अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम लग गया है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि इस अवधि में नए शुभ कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए और ग्रहों के पुनः अनुकूल होने की प्रतीक्षा करनी चाहिए।
चातुर्मास में क्यों रुक जाते हैं विवाह?
हिंदू धार्मिक परंपरा के अनुसार देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और चातुर्मास का शुभारंभ होता है। इस दौरान भगवान शिव सृष्टि के संचालन का दायित्व संभालते हैं। चार महीनों की यह अवधि तप, साधना, व्रत, दान और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है, लेकिन विवाह जैसे मांगलिक संस्कार इस दौरान नहीं किए जाते। इसी कारण देशभर में शहनाइयों की गूंज भी कुछ समय के लिए थम जाती है।
नवंबर में फिर शुरू होगा विवाह का नया सीजन
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार देवउठनी एकादशी के बाद भगवान विष्णु पुनः जागृत होते हैं और इसके साथ ही मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है। नवंबर 2026 से विवाह के नए मुहूर्त उपलब्ध होने लगेंगे। ऐसे में जिन परिवारों ने विवाह समारोह स्थगित किए हैं, वे अब वर्ष के अंतिम महीनों में शुभ तिथियों के अनुसार अपने आयोजन कर सकेंगे। विवाह उद्योग से जुड़े व्यवसायों में भी इसी अवधि से फिर रौनक लौटने की उम्मीद है।
धार्मिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है यह अवधि?
चातुर्मास को आत्मचिंतन और आध्यात्मिक साधना का श्रेष्ठ काल माना गया है। इस दौरान श्रद्धालु व्रत, जप, तप, कथा-श्रवण, तीर्थ सेवा और दान-पुण्य जैसे धार्मिक कार्यों में अधिक समय देते हैं। मान्यता है कि इस अवधि में किए गए आध्यात्मिक प्रयास विशेष फलदायी होते हैं। इसलिए विवाह जैसे सामाजिक उत्सवों की बजाय धर्म और साधना को प्राथमिकता दी जाती है।
ज्योतिषीय परंपरा और आधुनिक जीवन के बीच संतुलन
आज के समय में अनेक लोग विवाह की तिथि तय करते समय पारिवारिक सुविधा और सामाजिक परिस्थितियों को भी महत्व देते हैं, लेकिन बड़ी संख्या में परिवार अब भी पंचांग और शुभ मुहूर्त का पालन करते हैं। गुरु अस्त और चातुर्मास की परंपरा भारतीय संस्कृति में सदियों से चली आ रही है और आज भी इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिलता है। नवंबर से शुभ मुहूर्त शुरू होने के बाद देशभर में विवाह समारोहों की रौनक एक बार फिर लौटने की संभावना है।