प्रेरणा केवल एक शब्द नहीं, बल्कि वह आंतरिक शक्ति है जो मनुष्य को लक्ष्य, उमंग और सकारात्मकता की ओर अग्रसर करती है। जब आत्मबल और प्रेरणा एक साथ संगठित होते हैं, तो मनुष्य असंभव प्रतीत होने वाले कार्यों को भी सहजता से पूरा कर लेता है। प्रेरणा जीवन में नई ऊर्जा, नई चेतना और नई दिशा का संचार करती है।
प्रेरणा — सकारात्मकता की अनंत धारा
‘प्रेरणा’ वह अनुभूति है, जो जीवन में उत्साह, आत्मविश्वास और उद्देश्य का बोध कराती है। यह हमें निरंतर इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है कि हम अपने प्रयासों में और अधिक ऊर्जा तथा गंभीरता जोड़ सकें। सच तो यह है कि प्रेरणा और आत्मबल एक-दूसरे के पूरक हैं—जहां सशक्त प्रेरणा होती है, वहां आत्मबल स्वतः ही प्रबल हो उठता है।
आत्मबल और अंतःप्रेरणा — असंभव को भी चुनौती
जब आत्मबल और अंतःप्रेरणा एक साथ हिलोरें भरते हैं, तब असंभव भी तिनके-सा हल्का हो जाता है। यह वही अवस्था है जब मनुष्य परिस्थितियों से नहीं, बल्कि अपने संकल्पों से परिचालित होता है। प्रेरणा हमें भय और संदेह से परे ले जाकर नई संभावनाओं का द्वार खोल देती है।
प्रेरणा — नया सबेरा देखने की तड़प
प्रेरणा वह शक्ति है जो नकारात्मकता की धुंध को भेदते हुए जीवन में ‘नया सबेरा’ रचती है। यह केवल सपने दिखाने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उन सपनों को साकार करने की क्षमता भी प्रदान करती है। यही कारण है कि प्रेरित मनुष्य साधारण होते हुए भी असाधारण उपलब्धियां अर्जित कर लेता है।
अनुभूति का जादू — जब प्रस्तर भी सजीव हो उठता है
जैसे किसी प्रस्तर मूर्ति के सामने खड़े होकर कब हमारा मन ‘वंदन भाव’ से भर उठता है—यह हमें महसूस भी नहीं होता। वह मौन मूर्ति हमें इतनी गहराई से स्पर्श करती है कि हम स्वयं ही ‘प्रस्तरवत’ हो जाते हैं। यह उसी प्रेरणा का प्रभाव है, जो निर्जीव को सजीव और सजीव को निर्जीव कर देने की सामर्थ्य रखती है।
कब किसी प्रस्तरखंड में हमें ‘देवी कात्यायनी’ का बोध हो जाए—शायद यही प्रेरणा की सहज, दिव्य अनुभूति है।
प्रेरणा — स्त्रीत्व की सृजनात्मक ऊर्जा
‘प्रेरणा’ स्वयं एक स्त्रीवाचक शब्द है। इसमें सृजन, करुणा, उत्साह और उपलब्धि की ऊर्जा समाहित है—जो देवी कात्यायनी के गुणों की स्मृति दिलाती है। प्रेरणा हमें लक्ष्य, उल्लास, उमंग और समर्पण के पथ पर अग्रसर करती है। यह न केवल स्वयं को उन्नत करने का भाव है, बल्कि समाज और समस्त प्राणियों के कल्याण का भी आह्वान है।
प्रेरणा बनें — प्रेरणा लें
आइए, उस ‘अनंत सत्ता’ से प्रेरणा ग्रहण करें, जो समस्त जीवों का कल्याण करती है। जहां संभव हो, स्वयं ‘प्रेरणापुंज’ बनें—और दूसरों के जीवन में भी आशा व उत्साह की ज्योति जगाएं। साथ ही स्वयं भी प्रेरणा लेते रहें, क्योंकि यही प्रेरणा का वास्तविक सार है—देना भी और ग्रहण करना भी।
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